केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल होनी है। इस बात पर किसी को संदेह नहीं है। एक एक करके मंत्री प्रदेश अध्यक्ष बन रहे हैं या राज्यसभा की टिकट नहीं मिलने से इस्तीफा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने मंत्रिपरिषद की बैठक की। पिछले दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई और केंद्रीय गृह मंत्री राष्ट्रपति से मिलने गए। इन सब बातों का लब्बोलुआब यह निकाला जा रहा है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल होनी है और साथ ही नितिन नबीन की टीम का गठन भी होना है। इसमें भी किसी को संदेह नहीं है कि नितिन नबीन की टीम में 60 साल से ज्यादा उम्र के गिने चुने लोग होंगे। 70 फीसदी लोग 50 साल की उम्र के आसपास के होंगे। यह भी पक्के तौर पर बताया जा रहा है कि सरकार में भी 30 से 40 फीसदी मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और वहां भी बिल्कुल नए चेहरे लाए जाएंगे। इस बात में ज्यादा दम नहीं है कि सरकार से हटा कर कुछ लोगों को संगठन में भेजा जाएगा। क्योंकि सरकार से जो लोग हटाए जाएंगे, वो सब राष्ट्रीय अध्यक्ष से ज्यादा उम्र, अनुभव और राजनीतिक वजन वाले होंगे।
इन निष्कर्षों के बाद सवाल है कि मीडिया में इन दिनों जो नाम चल रहे हैं वो नाम कौन बता रहा है? कोई बता भी रहा है कि अपने मन से ये नाम लिखे जा रहे हैं? शक्तिकांत दास, जिनको कुछ समय पहले प्रधानमंत्री की टीम में शामिल किया गया वे देश के अगले वित्त मंत्री होंगे यह बात किसने बताई है? निर्मला सीतारमण अगली शिक्षा मंत्री होंगी या अनुराग ठाकुर के कैबिनेट मंत्री के तौर पर वापसी होने जा रही है या धर्मेंद्र प्रधान व हरदीप पुरी की विदाई हो रही है या अरुण गोविल मंत्री बनने जा रहे हैं, श्रीकांत शिंदे को भी मंत्री पद मिलने जा रहा है ये सब बातें कौन मीडिया को बता रहा है? ये सवाल इसलिए हैं क्योंकि जिन लोगों को फैसला करना है वे किसी को कुछ नहीं बताते हैं। दूसरी बात यह है कि सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में इन नामों की सूची में नीतीश कुमार का नाम भी पूरे दावे से बताया जा रहा है। यह देखने के बाद तो इस पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं बचता है।
वैसे भी मंत्रियों के मामले में जहां गोपनीयता रखनी होती है वहां भाजपा कैसे गोपनीयता रखती है यह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की शपथ के दिन दिखा। शपथ के दिन मुख्यमंत्री के साथ कितने लोग शपथ लेंगे और वो कौन कौन होंगे, यह तब तक पता नहीं चला, जब तक शपथ शुरू नहीं हो गई। मंच के सामने मौजूद टेलीविजन रिपोर्टर भी दो मिनट पहले तक नहीं बता पाए थे कि कितने लोग शपथ लेंगे। इसलिए मंत्रिपरिषद के सदस्यों के नामों की जो सूची घूम रही है वह विशुद्ध रूप से अटकल है। संभाव्यता के नियम के हिसाब से इसमें से कुछ सही हो जाएगा। पत्रकारों की अटकलों के अलावा एक कहानी यह है कि हर नेता अपना नाम चलवा रहा है। अपने वीर बालकों से वह कहानी प्लांट करा रहा है कि इस बार उसको सरकार में मौका मिलने जा रहा है। संभावित सूची में जितने लोगों के नाम हैं उनमें से कई लोगों ने खुद ही यह सूची सरकुलेट की है। यानी नेता अपना पोस्टर खुद ही चिपका रहे हैं। इसके अलावा यह भी कहानी है कि लंबे समय तक शासन में रहने और दलबदल के कारण भाजपा का जो कांग्रेसीकरण हुआ है उसमें हर राज्य से कई कई नेता अपना गुट बना कर खड़े हो गए हैं। सब एक दूसरे के खिलाफ भी खबरें प्लांट करा रहे हैं।


