Milkipur election: भाजपा ने बड़ा जोखिम लिया है। उत्तर प्रदेश में प्रतिष्ठा की लड़ाई बनी मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी ने बिल्कुल नए चेहरे को उतारा है।
भाजपा ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर चंद्रभानु पासवान को उतारा है। उनका सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी के अजित प्रसाद से होगा।
यह सीट अवेधश प्रसाद के लोकसभा चुनाव जीतने की वजह से खाली हुई है। अवधेश प्रसाद फैजाबाद सीट पर भाजपा के लल्लू सिंह को हरा कर सांसद बने हैं।
फैजाबाद सीट के तहत ही अयोध्या का क्षेत्र भी आता है। तभी सपा और तमाम विपक्षी पार्टियों ने फैजाबाद सीट पर भाजपा की हार को लेकर प्रचार किया कि वह राममंदिर का उद्घाटन करने के बावजूद अयोध्या हार गई।
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तभी यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। खास कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए।
लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने नौ सीटों के उपचुनाव में सात पर भाजपा को जीत दिला कर अपनी ताकत दिखाई है लेकिन उन सभी सात सीटों से ज्यादा महत्व अकेले मिल्कीपुर सीट का है।
अगर भाजपा इस सीट पर नहीं जीतती है तो अयोध्या की हार की टीस अगले चुनाव तक बनी रहेगी। और अगर जीत जाती है तो फैजाबाद में सपा की जीत को एक संयोग माना जाएगा।
तभी सवाल है कि ऐसी प्रतिष्ठा की सीट पर भाजपा ने नए चेहरे पर दांव क्यों लगाया? कहा जा रहा है कि पिछले कई बार से चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ के बारे में पार्टी की स्थानीय ईकाई ने निगेटिव फीडबैक दी थी।
इसलिए उनकी टिकट कटी। यह भी कहा जा रहा है कि सपा के नए चेहरे के मुकाबले भाजपा को भी नया चेहरा उतारने की मजबूरी हो गई थी।
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Image Source: ANI


