दो महीने छह दिन यानी 66 दिन के बाद जंतर मंतर पर नए सिरे से प्रदर्शन हुआ और साथ ही पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी शुरू हुई। इस बार भी पुलिस और प्रदर्शनकारी अपने अपने हिसाब से शिकायत कर रहे हैं। पुलिस की शिकायत है कि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों के नाम लेकर उनको टारगेट कर रहे हैं। पुलिसकर्मियों के बैज पर लिखे गए नाम को पढ़ कर जोर से बोल रहे हैं और उनको निशाना बना रहे हैं। पुलिस को लग रहा है कि इससे सोशल मीडिया में ट्रोलिंग और परेशान करने का मौका बन रहा है। गौरतलब है कि आईसा की नेता नेहा बोरा को जब पुलिस बस में बैठा रही थी तब वे जोर जोर से एक महिला पुलिसकर्मी का नाम ले रही थीं और आरोप लगा रही थीं कि उसने ज्यादती की है। मीडिया में उस नाम की खूब चर्चा हो गई और सोशल मीडिया में भी यह वायरल हो गया।
इसके बाद बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों ने अपने बैज उतारने शुरू कर दिए। अब वे प्रदर्शनकारियों को पकड़ कर बस में बैठा रहे हैं तो उससे पहले नाम हटा ले रहे हैं। इसकी शिकायत नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने की है। सीपीआई के सांसद पी संदेश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से शिकायत की है। उन्होंने चिट्ठी लिखी है कि पुलिसकर्मी बैज उतार कर कार्रवाई कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले जून और जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शिकायत की थी सादी वर्दी में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जो कील लगे डंडे से लोगों को मार रहे थे। सादी वर्दी में ऐसे कई लोगों की पहचान की गई थी और सुप्रीम कोर्ट में जब यह मामला पहुंचा तो इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था। सो, इस बार सादी वर्दी की बजाय बिना बैज के पुलिस तैनात है।
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