मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को स्थगित कराने के लिए विपक्ष ने साझा कार्य योजना बनाई थी लेकिन तीन दिन के बाद ऐसा दिख रहा है कि सब अलग अलग लड़ रहे हैं। सबके प्रदर्शन अलग अलग हो रहे हैं। पहले दिन यानी दो अक्टूबर को कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के छात्रों ने जंतर मंतर पर लेफ्ट और आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन का समर्थन किया लेकिन किसी ने उनका नाम नहीं लिया। इसलिए अगले दिन यानी तीन अक्टूबर को एनएसयूआई ने जगह बदल दी। लेफ्ट और आप के नेता कुछ सिविल सोसायटी के लोगों के साथ जंतर मंतर पहुंचे तो एनएसयूआई के छात्र और नेता इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने पहुंच गए। तभी ने तो जंतर मंतर के प्रदर्शन का कोई माहौल बना और न इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन को किसी ने तवज्जो दी। ऐसे ही मुंबई में रविवार, चार अक्टूबर को उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी मनसे के साथ मिल कर प्रदर्शन किया। दो अक्टूबर को उद्धव सीजेपी के प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे।
सोचें, 30 सितंबर को दिल्ली में हुई ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस और लेफ्ट दोनों के नेता शामिल थे। उसमें एक साथ दो से आठ अक्टूबर तक प्रदर्शन करने का फैसला किया। यह भी तय किया गया कि छह अक्टूबर को चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन का घेराव किया जाएगा, जिसमें सभी पार्टियों के सभी बड़े नेता शामिल होंगे। इस बैठक में जो पार्टियां नहीं शामिल हुईं या जिनको नहीं बुलाया गया। उनकी बात अलग है। आम आदमी पार्टी को नहीं बुलाया गया था। इसलिए अगर उसके नेता अलग प्रदर्शन करते हैं तो कांग्रेस को आपत्ति नहीं है। इसी तरह कॉकरोच जनता पार्टी तो अभी पार्टी भी नहीं है। इसलिए उसके लिए लोग अलग प्रदर्शन कर रहे हैं तो उससे भी कांग्रेस को समस्या नहीं है।
लेकिन अगर लेफ्ट पार्टियों के नेता अलग प्रदर्शन करते हैं या उद्धव ठाकरे की शिव सेना अलग प्रदर्शन करती है तो यह विपक्षी एकता के लिए ठीक नहीं है। कांग्रेस नेता इस बात से आहत हैं कि लेफ्ट के बड़े नेता आम आदमी पार्टी के साथ मिल कर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं तो उद्धव व आदित्य ठाकरे ने सीजेपी के आंदोलन में हिस्सा लिया। उद्धव और आदित्य ठाकरे दो अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे। अब तक कांग्रेस का साथ देने वाले सिविल सोसायटी और फिल्म बिरादरी के लोग भी सीजेपी या लेफ्ट के आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस के प्रदर्शन में उसकी सहयोगी राजद के नेता भी नहीं शामिल हो रहे हैं।
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