केरल में कांग्रेस पार्टी के चुनाव जीतने के बाद तिरूवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर थोड़े दिन चुप रहे थे। यहां तक कि वे अपनी पार्टी के नेताओं की तारीफ भी करने लगे थे और भाजपा पर हमला भी किया था। लेकिन अब फिर वे पुराने रंग में लौट आए हैं। फर्क यह है कि इस बार वे तार्किक बातें नहीं कर रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में उन्होंने जो दो बयान दिए हैं वे तर्कसंगत नहीं हैं और तथ्यात्मक रूप से भी सही नहीं हैं। लेकिन ऐसा लग रहा है कि वे किसी मौके के इंतजार में थे और मौका नहीं मिली तो मौका बना कर ऐसा बयान दिया, जिससे कांग्रेस के नेता चिढ़ें। इस बार उन्होंने जो विवाद खड़ा किया है वह ऑर्गेनिक नहीं है।
जैसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नाविकों का मुद्दा उठाया। असल में प्रधानमंत्री ने हार्मुज की खाड़ी में अमेरिकी नौ सैनिकों द्वारा मारे गए तीन भारतीय नाविकों का मुद्दा नहीं उठाया था। प्रधानमंत्री ने बिना उनका जिक्र किए सामान्य रूप से सभी नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। तीन नाविकों के मारे जाने की घटना पर ट्रंप या उनके प्रशासन ने माफी मांगने और मुआवजा देने की बजाय कहा कि सबको अमेरिका का बनाया नियम मानना चाहिए नहीं तो कार्रवाई होगी। इस तरह थरूर ने जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की और कह दिया कि राज्य में स्थितियां सामान्य हो गई हैं। यह भी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है क्योंकि अगर स्थितियां सामान्य होतीं तो भाजपा की केंद्र सरकार ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया होता।


