महाराष्ट्र और झारखंड में एक साथ विधानसभा चुनाव हुए। लगभग एक तरह के मुद्दों पर चुनाव लड़ा गया। दोनों राज्यों में ‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा जोर शोर से उठाया गया। इसी तरह दोनों राज्यों में खुले हाथ से ‘मुफ्त की रेवड़ी’ बांटी गई और नई सरकार बनने पर मुफ्त की ढेर सारी और चीजें व सेवाएं देने का वादा किया गया। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद दोनों राज्य सरकारों के कामकाज से इसका फर्क दिखने लगा है। पहली कैबिनेट में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जहां अपने वादे के मुताबिक ‘मइया सम्मान योजना’ की राशि 11 सौ रुपए महीना से बढ़ा कर ढाई हजार कर दिया है और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दिसंबर महीने से ही बढ़ी हुई राशि महिलाओं को दी जाए वहीं महाराष्ट्र ने यह फैसला टाल दिया है।
सोचें, महाराष्ट्र राजस्व के मामले में देश के सबसे अमीर राज्यों में शामिल है लेकिन शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डनवीस ने कैबिनेट की पहली बैठक में ‘माझी लाड़की बहिन योजना’ की राशि में बढ़ोतरी का फैसला टाल दिया और साथ ही इस योजना की समीक्षा करने की भी बात कही। गौरतलब है कि राज्य में इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने डेढ़ हजार रुपए दिए जा रहे हैं, जिसे बढ़ा कर 21 सौ रुपए करने का वादा किया गया था। कुछ दिन पहले प्रदेश भाजपा के नेताओं ने कहा था कि वे राशि बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। लेकिन सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने कह दिया है कि बढ़ी हुई राशि अगले वित्त मंत्री यानी मार्च 2025 के बाद मिलेगी। उसके बाद भी कब से मिलेगी यह नहीं कहा गया है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि योजना की समीक्षा की जाएगी और उन लोगों की पहचान की जाएगी, जो पात्र नहीं होने के बावजूद इसका लाभ ले रहे हैं। गौरतलब है कि नितिन गडकरी सहित भाजपा के कई नेता यह सवाल उठा चुके हैं इस योजना पर 46 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। अगर राशि बढ़ाई जाती है तो खर्च 60 हजार करोड़ रुपए या उससे ऊपर भी जा सकता है। तभी सरकार उधेड़बुन में लगी है। उधर हेमंत सोरेन ने 73 सौ करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि के साथ इस योजना की रकम दोगुने से ज्यादा करने का फैसला कर दिया।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.
Image Source: ANI

