कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों के दबाव में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सीट बंटवारे और चुनाव रणनीति पर सहयोगी पार्टियों के साथ बातचीत का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि 22 फरवरी से बातचीत होगी। इससे पहले डीएमके की ओर से साफ कर दिया गया था कि पहले की तरह चुनाव की घोषणा के बाद ही सीट बंटवारे की बातचीत होगी। यह भी कहा जा रहा था कि जब सीटों की संख्या में कोई फेरबदल नहीं होनी है तो फिर पहले से बातचीत की कोई जरुरत नहीं है। लेकिन कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के साथ साथ वीसीके ने भी दबाव बनाया। असल में लेफ्ट और वीसीके इस समय राज्य में अपना राजनीतिक अभियान अलग से चला रहे हैं।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पूरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। उनकी पार्टी ने कहा था कि दौरा समाप्त होने के बाद सीट बंटवारे पर बातचीत होगी। डीएमके ने कहा था कि पार्टी की नेता कनिमोझी करुणानिधि ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी और अभी बातचीत की जरुरत नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस ने दबाव बनाए रखा। कांग्रेस ने यह भी कहा कि उसे 25 से ज्यादा सीट चाहिए। हालांकि इसकी कोई संभावना नहीं है। फिर भी कांग्रेस चाहती है कि बातचीत की टेबल पर एमके स्टालिन से आमने सामने इस पर चर्चा हो। असल में स्टालिन एक या दो छोटी पार्टियों को और शामिल कर रहे हैं। कमल हसन की पार्टी को भी सीटें देनी हैं। इसलिए वे किसी भी सहयोगी की सीट नहीं बढ़ाएंगे। आमने सामने की बातचीत में यह बात कांग्रेस, लेफ्ट और वीसीके को बता दी जाएगी।


