भारत ने क्या अमेरिका के राष्ट्रपति को विदेश और आर्थिक मामलों का अपना प्रवक्ता नियुक्त कर लिया है? अगर नहीं किया है तो सरकार को तुरंत इस पर संज्ञान लेना चाहिए और अमेरिका से बात करके आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। भारत को दो टूक अंदाज में कहने की जरुरत है कि भारत की नीतिगत घोषणाएं अमेरिका का राष्ट्रपति कैसे कर सकता है? सोचें, कितनी हैरानी की बात है कि भारत के नीतिगत फैसलों के बारे में ही नहीं, बल्कि सामरिक फैसलों के बारे में भी ट्रंप दुनिया को जानकारी दे रहे हैं और हर बार खबर आ रही है कि भारत ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कोई दक्षिण अमेरिकी देश हो, जिसे ट्रंप या अमेरिका अपना बैकयार्ड करता है तो बात समझ में आती है। भारत तो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और भाजपा व संघ के लोगों की मानें तो अब विश्वगुरू होने से दो चार कदम की दूरी पर ही है।
फिर भी अमेरिका के राष्ट्रपति भारत की नीतिगत घोषणाएं कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने दो दिन पहले बताया कि भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। उनके इस ऐलान से दो दिन पहले वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया था। दोनों के बीच अच्छी बातचीत हुई थी और प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख कर बताया था कि दोनों नेताओं ने दोपक्षीय संबंधों को और गहराई देने के बारे में बात की। तभी यह संभावना जताई गई थी कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने ट्रंप के कहने पर फोन किया होगा क्योंकि वेनेजुएला का प्रशासन तो अभी ट्रंप की बनाई एक कमेटी ही संभाल रही है, जिसके प्रमुख अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो हैं। सो. यहां तक बात समझ में आती है कि डेल्सी रोड्रिग्ज ने अमेरिका के कहने पर फोन किया। डेल्सी और मोदी के बीच निश्चित रूप से तेल खरीद पर बात हुई होगी। लेकिन कायदे से इसकी घोषणा तो भारत को करनी चाहिए। लेकिन भारत कुछ कहे उससे पहले ट्रंप ने ऐलान कर दिया। ध्यान रहे वेनेजुएला के पास दुनिया में सबसे ज्यादा कच्चा तेल है और वहां के राष्ट्रपति को अगवा कर लेने के बाद अमेरिकी कंपनियां ही उसका तेल का खजाना संभालेंगी।
बहरहाल, यह कोई पहला नीतिगत मामला नहीं था। राष्ट्रपति ट्रंप ने ही कहा था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। और सचमुच भारत ने रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया। अब रूस से क्च्चे तेल के खरीदारों में भारत तीसरे नंबर पर आ गया है, जो कुछ दिन पहले तक नंबर एक था। जब भारत ने रूस से तेल खरीदना कम किया तो अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अब भारत पर लगाया गया 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ हटाया जा सकता है। याद करें इससे पहले कैसे राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का ऐलान किया था। 10 मई 2025 को ट्रंप ने ऐलान किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करा दिया है और अब युद्ध रूक जाएगा। ट्रंप की इस घोषणा के आधे या एक घंटे के बाद भारत की ओर से एक मिनट से कम की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें कहा गया कि सीजफायर हो गया है। भारत भले कहता रहा कि पाकिस्तान के अनुरोध पर सीजफायर का फैसला भारत ने खुद कि. लेकिन दुनिया ने देखा कि ऐलान ट्रंप ने किया। सो, पाकिस्तान के साथ सीजफायर हो, रूस से तेल खरीद बंद करना हो या वेनेजुएला से तेल खरीदना हो, सबकी घोषणा ट्रंप कर रहे हैं।


