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अधिक वोट, ईवीएम का कांग्रेस दांव

ByNI Political,
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चार राज्यों के नतीजे आने के बाद तीन राज्यों में हारी कांग्रेस ने एक दांव खेला था। कांग्रेस नेताओं ने हार-जीत से अलग यह बताना शुरू किया था कि पार्टी को कितने वोट मिले हैं। यह नैरेटिव बनाने का प्रयास हुआ कि असल में कांग्रेस को भाजपा से 10 लाख वोट ज्यादा मिले हैं। भाजपा से ज्यादा वोट मिलने की बात के साथ साथ कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने पोस्टल बैलेट के आंकड़ों के सहारे बताया कि उसमें कांग्रेस को 19 फीसदी वोट ज्यादा मिले हैं। फिर आया इलेक्ट्रोनिक वोटिंक मशीन यानी ईवीएम पर सवाल उठाने का दौर। इस पोस्टल बैलेट के बहाने और दूसरे आंकड़ों के सहारे भी कांग्रेस नेताओँ ने ईवीएम पर हार का ठीकरा फोड़ा। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तो ट्विट किया कि ईवीएम जीत गई और जनता का मत हार गया।

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा वोट मिलने, पोस्टल बैलेट में लीड करने और ईवीएम की गड़बड़ी का मामला एक रणनीति के तहत प्रचारित किया। नतीजों के तुरंत बाद जिन पार्टियों ने कांग्रेस पर हमला शुरू किया था और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की जो पार्टियां कांग्रेस से दूरी बना रही थीं वो सब अब कांग्रेस के पीछे खड़ी हो रही हैं। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि सब कांग्रेस को नेता मान लेंगे या कांग्रेस पर दबाव नहीं बनाएंगे लेकिन कांग्रेस के दांव से इन पार्टियों को भी लगने लगा है कि वह अब भी बड़ी ताकत है।

कांग्रेस के इस दांव को सबसे पहले लालू प्रसाद ने समझा और आगे बढ़ाया। राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने छह दिसंबर को प्रस्तावित हुई बैठक में हिस्सा लेने का भी फैसला कर लिया था और कांग्रेस के सुर में सुर मिलाते हुए कहा था कि कांग्रेस हारी नहीं है। इसके बाद यही बात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कही। उनकी पार्टी ने पहले कांग्रेस पर दबाव बनाया था लेकिन तीन दिन के बाद खुद नीतीश कुमार ने कहा कि उनको विपक्षी गठबंधन से कोई शिकायत नहीं है और न कांग्रेस से कोई शिकायत है। नीतीश ने भी कांग्रेस की लाइन आगे बढ़ाते हुए कहा कि कांग्रेस को बहुत वोट मिला है। असल में यह बहुत वोट मिलने या 40 फीसदी वोट मिलने का नैरेटिव कांग्रेस के बहुत काम आ रहा है।

अब तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी लाइन पर आ गई हैं। उन्होंने कहा है कि विपक्षी गठबंधन की अगली जब भी बैठक होगी वे उसमें शामिल होंगी। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी ने उनको फोन किया था। शिव सेना और एनसीपी को पहले से कोई दिक्कत नहीं थी। रही बात समाजवादी पार्टी की तो उसे कुछ अन्य कारण से समस्या है। लेकिन उसे भी सुलझा लिए जाने की संभावना है।

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