कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की चर्चा थम गई है। ऐसा लग रहा है कि डीके शिवकुमार के लोगों ने भी स्वीकार कर लिया है कि सिद्धारमैया ही 2028 में होने वाले चुनाव तक मुख्यमंत्री रहेंगे। वैसे भी अब दो साल का कार्यकाल बचा है। दूसरी ओर सिद्धारमैया समर्थक भी शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग नहीं कर रहे हैं। लेकिन ऐसा लग रह है कि यह तूफान से पहले की खामोशी है। मुख्यमंत्री पद के लिए कम से कम एक बार और शिवकुमार जोर लगाएंगे। जानकार सूत्रों का कहना है कि असम के चुनाव नतीजे अगर कांग्रेस के अनुकूल आते हैं तो वहां पार्टी को चुनाव लड़वा रहे डीके शिवकुमार का कद बढ़ेगा और वे मुख्यमंत्री पद के लिए जोर लगाएंगे।
इसी तरह यह भी कहा जा रहा है कि अगर कर्नाटक में दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस नहीं जीतती है तब भी डीके शिवकुमार समर्थकों को मौका मिलेगा और वे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हटाने की मांग करेंगे। गौरतलब है कि कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों दावेनगेर दक्षिण और बागलकोट सीट पर उपचुनाव हो रहा है। दोनों सीटें कांग्रेस की हैं। इसलिए मुख्यमंत्री के ऊपर इस बात का दबाव है कि वे कांग्रेस को जीत दिलाएं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सोमवार, 30 मार्च को बागलकोट में और 31 मार्च को दावनगेर दक्षिण क्षेत्र में चुनाव प्रचार में जाएंगे। इससे पहले उन्होंने साफ कर दिया है कि कांग्रेस जीतेगी लेकिन इन दोनों उपचुनावों के नतीजे को नेतृत्व के मुद्दे के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उनके कहने का मतलब है कि इन दो सीटों पर हार जीत से उनके मुख्यमंत्री पद को नहीं जोड़ा जाना चाहिए। लेकिन जिस तरह से वे मेहनत कर रहे हैं और दोनों सीटों पर बागियों को मनाने का प्रयास किया है उससे लग रहा है कि वे भी बहुत गंभीरता से इस चुनाव को ले रहे हैं। दोनों सीटों पर अगले महीने उपचुनाव होगा और चार मई को वोटों की गिनती होगी।


