जब भी सरकार किसी अधिकारी को सेवा विस्तार देती है तो इस बात की पुष्टि होती है कि सरकार के पास अपने भरोसेमंद अधिकारियों की कमी है और इसलिए वह एक ही अधिकारी को लंबे समय तक बनाए रखती है। आमतौर पर माना जाता है कि सारे अधिकारी सरकार के हैं और किसी एक अधिकारी को बार बार सेवा विस्तार देने से दूसरे अधिकारियों के साथ अन्याय होता है क्योंकि वे अपने विभाग के सर्वोच्च पद तक पहुंचने से वंचित रह जाते हैं। सेवा विस्तार की नीति से अधिकारियों के अंदर भी नाराजगी पैदा होती है भले वह कुछ कह नहीं पाए। यह सरकार सेवा विस्तार देने के मामले में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है।
सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया है। वे अब 14 जुलाई 2027 तक विदेश सचिव बने रहेंगे। ध्यान रहे 14 जुलाई 2024 को जब उनको विदेश सचिव बनाया गया था तब भी वे रिटायर होने वाले थे। नवंबर 2024 में उनकी रिटायरमेंट थी। उससे पांच महीने पहले उनको विदेश सचिव बनाया गया। इस तरह उनको 19 महीने का सेवा विस्तार मिला था। अब फिर एक साल का सेवा विस्तार मिल गया है। कुछ दिन पहले ही सीबीआई के निदेशक प्रवीण सूद को एक साल का सेवा विस्तार मिला। उनको उससे पहले भी एक साल का सेवा विस्तार मिला था। यानी वे कम से कम चार साल सीबीआई निदेशक रहेंगे। ईडी के प्रमुख रहे संजय मिश्रा को तो इससे भी ज्यादा सेवा विस्तार मिला था। सेवा विस्तार के साथ साथ सरकार यह भी सुनिश्चित करती है कि रिटायर होने के बाद भी चहेते अधिकारी कहीं न कहीं काम करें। संजय मिश्रा को तो प्रधानमंत्री की सलाहकार समिति में रखा गया है। हाल ही में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी का पार्ट टाइम चेयरमैन बनाया गया है।
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