मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा के चुनाव में भाजपा की ओर से सबसे अहम भूमिका निभाई है। टिकट बंटवारे में सबसे ज्यादा उनकी चली। उनकी मर्जी से बड़ी संख्या में दूसरी पार्टियों के नेता भाजपा में शामिल कराए गए और उनको भी टिकट दी गई। मुख्यमंत्री के रूप में नायब सिंह सैनी भी उनकी ही पसंद हैं। उन्होंने शुरू में पार्टी के लिए सबसे ज्यादा सक्रियता के साथ प्रचार भी किया। लेकिन जैसे जैसे प्रचार आगे बढ़ा और भाजपा को फीडबैक मिली वैसे वैसे उनकी भूमिका कम होनी शुरू होगी। असल में चुनाव से पहले ही हरियाणा में कहा जा रहा था कि अगर खट्टर इसी तरह सक्रिय बने रहे तो उनको हटा कर उनके साढ़े नौ साल के राज की एंटी इन्कम्बैंसी कम करने की रणनीति कामयाब नहीं हो पाएगी।
सो, कई नेता चुनाव की घोषणा के पहले ही खट्टर को किनारे करने के पक्ष में थे। वे नहीं चाहते थे कि योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास में खट्टर ज्यादा सक्रिय रहें या उनका चेहरा ज्यादा दिखे। लेकिन पहले भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह बात समझ में नहीं आई। चुनाव प्रचार के अंत में जाकर भाजपा को यह बात समझ में आई तो उनको प्रचार से दूर किया गया। ज्यादातर जगहों पर भाजपा के चुनावी पोस्टर से खट्टर को हटाया गया। चुनावी रैलियों के पोस्टर में भी उनको जगह नहीं दी गई। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक को छोड़ कर हर रैली से वे दूर रहे। उन्होंने सिर्फ हिसार में प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा किया। बाकी जगह वे कैमरे से दूर रहे। इतना ही नहीं प्रदेश में प्रचार कर रहे भाजपा के नेता खट्टर का नाम नहीं ले रहे हैं और न उनकी सरकार की उपलब्धियां बता रहे हैं।
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Image Source: UNI

