बिहार और ओडिशा के अलावा तीसरा राज्य हरियाणा है, जहां राज्यसभा चुनाव के लिए नाम वापसी का समय बीतने के बाद चुनाव की स्थिति पैदा हुई है। हरियाणा में विधानसभा की गणित के हिसाब से भाजपा और कांग्रेस दोनों के खाते में एक एक सीट जाने वाली है। भाजपा ने संजय भाटिया और कांग्रेस ने करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया। राज्य में एक सीट जीतने के लिए 31 वोट की जरुरत है, जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। यानी आराम से उसके उम्मीदवार को जीत जाना चाहिए। लेकिन राहुल गांधी ने सचिवालय में नौकरी से रिटायर एक अराजनीतिक व्यक्ति को उम्मीदवार बना कर अपनी पार्टी के लिए मुश्किल की स्थिति पैदा कर दी है।
कांग्रेस ने जैसे ही करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया वैसे ही हरियाणा के एक बड़े कारोबारी सतीश नंदल मैदान में आ गए। भाजपा की विधायक और देश की सबसे अमीर महिला कारोबारी सावित्री जिंदल उनके नामांकन में गईं। ध्यान रहे हरियाणा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं। यानी एक सीट जीतने के बाद उसके पास 17 वोट बचते हैं। उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी हासिल है। इस लिहाज से उसके 20 वोट हो जाएंगे। फिर भी उसे 11 वोट का इंतजाम करना होगा। इंडियन नेशनल लोकदल के दो विधायक हैं। इनके समर्थन से भी बात नहीं बनेगी। तभी जाहिर है कि सतीश नंदल पूरी तरह से कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग के भरोसे चुनाव लड़ रहे हैं। ध्यान रहे एक बार कांग्रेस के 14 विधायकों को वोट रहस्यमय तरीके से अवैध हो गए थे, तब कांग्रेस समर्थित इनेलो उम्मीदवार आरके आनंद हार गए थे और उसके बाद कांग्रेस की एक महिला विधायक की क्रॉस वोटिंग के कारण अजय माकन हार गए थे। तभी भाजपा को इस बार भी उम्मीद है। लेकिन इस बार कहा जा रहा है कि राज्य में पार्टी के सर्वोच्च नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा मन मार कर ही सही राहुल गांधी के उम्मीदवार को जिताएंगे।


