झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम का दौरा किया तो उसके तुरंत बाद असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई और प्रभारी जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे थे। लेकिन ऐसा लग रहा है कि किसी ने उनको मनाने का ईमानदारी से प्रयास नहीं किया। खबर है कि हेमंत सोरेन की पार्टी असम में विधानसभा का चुनाव लड़ रही है। झारखंड मुक्त मोर्चा ने पश्चिम बंगाल में भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। हालांकि यह पता नहीं है कि वह कितनी सीटों पर लड़ेगी। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में तो ममता बनर्जी के कुछ करीबी लोग उनके संपर्क में हैं और वहां के लिए कुछ बात हो रही है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सात फीसदी के करीब आदिवासी आबादी है, जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सा संथाल आदिवासियों का है। पिछले दिनों संथाल आदिवासि.यों के सम्मेलन में ही हिस्सा लेने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गई थीं। वे खुद संथाल आदिवासी हैं। हेमंत सोरेन भी इसी समुदाय से आते हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को अकेले लड़ना है और उसको पता है कि मालदा और मुर्शिदाबाद के छोटे से इलाके को छोड़ कर उसे कहीं कुछ हासिल नहीं होना है। उसके पास 294 सीटों में दो सौ से ज्यादा सीटों पर लड़ने के लिए अच्छे उम्मीगदवार नहीं हैं। ऐसे में वह हेमंत सोरेन से तालमेल करके उनको झारखंड से लगते दक्षिणी बंगाल इलाके में और उत्तर बंगाल के आदिवासी बहुल इलाकों में अच्छी खासी सीटें दे सकती थी। वह उनसे असम में भी कुछ सीटें देकर तालमेल कर सकती थी। लेकिन उनसे तालमेल को कांग्रेस नेता गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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