यह लाख टके का सवाल है कि उत्तर प्रदेश के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी राज्य सरकार और संगठन के बीच कैसे तालमेल बैठाएंगे? अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कह तो दिया है कि वे दोनों के बीच तालमेल बैठाने का काम करेंगे। लेकिन भाजपा के नेताओं का मानना है कि यह काम लगभग असंभव है। इसका कारण यह है कि सरकार का नेतृत्व कर रहे योगी आदित्यनाथ इतने मजबूत हैं कि उनके सामने संगठन का कोई मतलब नहीं रह जाता है। भूपेंद्र सिंह चौधरी इससे पहले पार्टी के अध्यक्ष थे लेकिन उनके रहते संगठन ने कोई ऐसा काम नहीं किया, जिससे लगे कि उसका कोई स्वतंत्र अस्तित्व है।
वैसे भी जहां सरकार होती है वहां सरकार को ही संगठन के तौर पर देखा जाता है और सरकार का मुखिया ही संगठन का मुखिया होता। अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसा हो तो संगठन के पास ज्यादा कुछ बचता नहीं है करने के लिए। लेकिन विधानसभा चुनाव से सवा साल पहले अध्यक्ष बने पंकज चौधरी पुराने नेता हैं और उनको मुख्यमंत्री के विरोधी खेमे का माना जाता है। तभी कहा जा रहा है कि वे अपनी शक्ति दिखाने का प्रयास कर सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उनको एक खास मकसद के तहत उत्तर प्रदेश भेजा गया है तो उनको उस मकसद को ध्यान में रख कर ही काम करना होगा। लेकिन मुश्किल यह है कि वे स्वतंत्र रूप से कोई भी काम करते हैं तो उसे टकराव का कारण माना जा सकता है। वे संगठन में ज्यादा फेरबदल भी शायद ही कर पाएं क्योंकि पिछले 10 साल में योगी आदित्यनाथ और उनके नजदीकी समर्थकों का सरकार से लेकर संगठन तक के ज्यादातर पदों पर कब्जा है। इसलिए पंकज चौधरी को बहुत सोच समझ कर कोई भी कदम उठाना होगा।


