कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के सामने अनोखी समस्या है। पहले तो उसके सामने यही समस्या आई कि उसके 11 विधायकों ने धोखा दे दिया। भाजपा के 11 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिसकी वजह से विधान परिषद के चुनाव में एनडीए का तीसरा उम्मीदवार हार गया और कांग्रेस का पांचवां उम्मीदवार जीत गया। सोचें, पूरे देश में जब दूसरी पार्टियों के विधायक और सांसद भाजपा के समर्थन में वोट कर रहे हैं तो कर्नाटक में भाजपा के 11 विधायकों ने कांग्रेस के समर्थन में वोट किया, जिससे जेडीएस के गोविंदराजू चुनाव हार गए। इस क्रॉस वोटिंग से भाजपा परेशान थी लेकिन अब बड़ी परेशानी यह है कि उनकी पहचान नहीं हो पा रही है।
ध्यान रहे राज्यसभा चुनाव में विधायक को वोट करने के बाद अपना बैलेट अपनी पार्टी के पोलिंग एजेंट को दिखाना होता है लेकिन एमएलसी का चुनाव गुप्त बैलेट से होता है। अगर राज्यसभा में बैलेट नहीं दिखाया जाए तो वोट अवैध होता है और एमएलसी में बैलेट दिखाए जाने पर वोट अमान्य होता है। इसलिए जब कर्नाटक में एनडीए के सभी 82 विधायक अपने ही उम्मीदवार को वोट देने का दावा कर रहे हैं तो उनमें कैसे पहचाना जाए कि किसने वोट नहीं दिया? यह स्थिति झारखंड में भी है, जहां जेएमएम, कांग्रेस, राजद और लेफ्ट सब दावा कर रहे हैं कि उन्होंने कांग्रेस के प्रणब झा को वोट किया। फिर भी भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी को पांच अतिरिक्त वोट मिल गए। यानी पांच लोगों ने क्रॉस वोटिंग की थी। बहरहाल, भाजपा आलाकमान ने कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को धोखेबाज विधायकों की पहचान के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों की पहचान हुई है लेकिन कोई खुल कर उनका नाम नहीं बता रहा है। आर अशोक को भी इस काम में लगाया गया है।
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