बिहार कांग्रेस में बगावत शुरू हो गई है। कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के खिलाफ मोर्चा खोला है। अखिलेख सिंह ने कहा है कि अराजनीतिक लोगों को प्रभारी बनाया गया, जिनकी वजह से पार्टी को विधानसभा चुनाव में नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से ठीक पहले उनको अध्यक्ष पद से हटाया गया इसका भी नुकसान पार्टी को हुआ। अखिलेश सिंह ने कहा है कि अगर वे प्रदेश अध्यक्ष रहते तो कांग्रेस सिर्फ पांच सीट पर नहीं सिमटती। अखिलेश ने कहा कि उन्होंने अध्यक्ष रहते चार सांसद जिताए हैं तो विधानसभा में उससे बेहतर प्रदर्शन करते। यह सारा मामला तब शुरू हुआ है, जब राहुल गांधी के बिहार दौरे की तैयारी हो रही है। राहुल 11 जुलाई को पटना में छात्रों से संवाद करेंगे।
गौरतलब है कि पिछले साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश सिंह को हटा कर राजेश राम को अध्यक्ष और मोहन प्रकाश को हटा कर कृष्णा अल्लावरू को प्रभारी बनाया गया था। दोनों टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक बुरी तरह से फेल हुए। अब राजेश राम को अध्यक्ष बने एक साल हो गए हैं और अभी तक वे प्रदेश पदाधिकारी नहीं नियुक्त कर पाए हैं और न कार्यकारिणी बनी है। यह काम तो अखिलेश सिंह भी नहीं कर पाए थे और उनसे पहले मदन मोहन झा भी नहीं कर पाए थे। पिछले आठ साल से कांग्रेस की प्रदेश कमेटी की गठन नहीं हुआ है, जबकि चार अध्यक्ष बदले। बिहार दौरे से पहले राहुल अगर इस पर ध्यान देते हैं तभी उनके किसी भी राजनीतिक अभियान का कोई लाभ कांग्रेस को मिल पाएगा।
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