मुंबई में मेयर तो भाजपा का ही बनेगा लेकिन उसके लिए एकनाथ शिंदे को मनाने में भाजपा को बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। खासतौर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को। फड़नवीस स्विट्जरलैंड के दावोस गए हैं, जहां उनको विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेना है। वहां से लौटने के बाद मुंबई और अन्य शहरों में मेयर का फैसला होगा। उससे पहले शिंदे ने अपने 29 पार्षदों को मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में शिफ्ट कर दिया है। होटल के बाहर पहरा है और बताया जा रहा है कि वही पर पार्षदों की बैठक होगी और वे अपना नेता चुनेंगे। दूसरी ओर शिंदे की मोलभाव को देखते हुए उद्धव ठाकरे की शिव सेना ने कह दिया है कि भगवान ने चाहा तो शिव सेना का मेयर बनेगा। गौरतलब है कि बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के आंकगणित उलझा हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति को 118 सीटें मिली हैं, जो बहुमत से सिर्फ चार ज्यादा हैं। दूसरी ओर विपक्ष की संख्या भी 109 है और उनको पांच की जरुरत है। एकनाथ शिंदे किंगमेकर हैं।
तभी कहा जा रहा है कि शिंदे ने ढाई ढाई साल के लिए मेयर पद भाजपा और शिव सेना के बीच बांटने की शर्त रखी है। हालांकि भाजपा इसके लिए तैयार नहीं होगी। आखिर भाजपा के 89 पार्षद हैं और शिंदे की शिव सेना के सिर्फ 29 हैं। भाजपा के नेता याद दिला रहे हैं कि जब शिव सेना एक थी तब 2017 के बीएमसी चुनाव में शिव सेना को 84 और भाजपा को 82 सीटें मिली थीं। फिर भी भाजपा ने पांच साल तक शिव सेना का मेयर रहने दिया था। उसने हिस्सेदारी नहीं मांगी थी। इसलिए शिंदे को 29 सीट पर हिस्सेदारी नहीं मांगनी चाहिए। जानकार सूत्रों का कहना है कि शिंदे मुंबई में ढाई साल के लिए अपना मेयर बनाने की जो बात कर रहे है वह सिर्फ पोजिशनिंग है। उन्होंने इसे बाला साहेब ठाकरे की सौवीं जयंती से जोड़ कर कहा है कि उनको श्रदधांजलि देने के लिए किसी शिव सैनिक को मेयर बनाया जाना चाहिए। अगर वे सचमुच ऐसा चाहते तो उद्धव ठाकरे की शिव सेना का मेयर बनवा देते। गौरतलब है कि उद्धव की शिव सेना के 65 और मनसे के छह पार्षद जीते हैं। कांग्रेस के 24 पार्षद हैं।
बहरहाल, एकनाथ शिंदे की नजर अपना कम से कम तीन मेयर बनाने पर है। वे मुंबई के बहाने मोलभाव कर रहे हैं उल्लहासनगर और कल्याण डोंबिवली के मेयर पद के लिए। गौरतलब है कि उल्लहासनगर में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिव सेना अलग अलग लड़े थे। वहां भाजपा को 37 और एकनाथ शिंदे की पार्टी के 38 पार्षद हैं। 78 सदस्यों की नगरपालिका में मेयर बनाने के लिए 39 की जरुरत है। कांग्रेस के दो और वंचित बहुजन अघाड़ी का एक पार्षद है। वहां भाजपा अपना मेयर बनाना चाहती है। इसी तरह कल्याण डोंबिवली का मामला है। शिंदे के बेटे श्रीकांत वहां से सांसद हैं। शिंदे की पार्टी को 52 और भाजपा को 51 सीटें मिली हैं, जबकि 122 के सदन में मेयर के लिए 62 वोट की जरुरत है। वहां हर हाल में शिंदे को अपना मेयर बनाना है। ठाणे में तो खैर उनकी शिव सेना को बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से ज्यादा सीटें हैं तो वहां समस्या नहीं है। तीन शहरों में मेयर पद के मोलभाव के साथ साथ कहीं न कहीं शिंदे को अपने पार्षद टूटने का खतरा भी दिख रहा है। उनको लग रहा है कि मुख्यमंत्री फड़नवीस उनके पार्षदों को तोड़ सकते हैं। इसलिए भी वे सावधानी बरत रहे हैं।


