यह बड़ा सवाल है कि महाराष्ट्र में भाजपा, शिव सेना और एनसीपी के सत्तारूढ़ गठबंधन यानी महायुति के अंदर शुरू हुआ विवाद कहां तक बढ़ेगा? क्या एनसीपी के नेता छगन भुजबल बागी होंगे? भुजबल ने नाराजगी का खुला इजहार कर दिया है। सरकार बनने पर वे मंत्री पद की इच्छा रखते थे औऱ उनको लग रहा था कि उन्हें कोई अहम मंत्रालय मिलेगा। मंत्रियों के शपथ से दो दिन पहले तक वे दिल्ली में अजित पवार के साथ थे।
परंतु जब अजित पवार के कोटे के नौ मंत्रियों के नाम राज्यपाल के पास भेजे गए तो उसमें से छगन भुजबल का नाम गायब था। अब उन्होंने कहा कि उनसे कहा गया था कि वे राज्यसभा चले जाएं। ध्यान रहे भुजबल जब राज्यसभा जाना चाहते थे तब अजित पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेज दिया था। सो, इस बार भुजबल ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।
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वे प्रदेश की पिछड़ा राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने मराठा आंदोलन के बरक्स ओबीसी आंदोलन खड़ा कर दिया था, जिसका फायदा महायुति को मिला। अब वे नाराज हैं। अगर वे शरद पवार के साथ लौटे तो यह अजित पवार के साथ साथ पूरे गठबंधन के लिए झटका होगा। इसी तरह एकनाथ शिंदे की पार्टी के दो विधायकों ने खुली नाराजगी जताई है। उनके एक विधायक नरेंद्र भोंडेरकर ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
एक दूसरे विधायक विजय शिवतारे ने भी नाराजगी जताई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दीपक केसरकर भी मंत्री नहीं बनने से दुखी हैं लेकिन उन्होंने खुली नाराजगी नहीं जताई है। एकनाथ शिंदे गुट के मुंबई क्षेत्र से जीते किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है। इससे भी नाराजगी है।
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Image Source: ANI


