राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

कांग्रेस को सहयोगियों का मैसेज

विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की पार्टियों ने कांग्रेस पार्टी को बहुत साफ शब्दों में मैसेज दिया है। यह कांग्रेस के ऊपर है कि वह उस मैसेज को किस रूप में लेती है और आगे का राजनीतिक रास्ता कैसे बनाती है। इस समय देश के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के सामने जो अभूतपूर्व संकट दिख रहा है उस संकट के बीच विपक्षी गठबंधन की बैठक हुई थी। तभी कायदे से सभी पार्टियों को अपने रागद्वेष छोड़ कर उसमें शामिल होना चाहिए था। यह सबको पता है कि डीएमके ने किन परिस्थितियों में गठबंधन छोड़ा और पंजाब के चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के लिए कांग्रेस के साथ दिखना कितना मुश्किल है। इसके बावजूद एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त मनमानियों का मुद्दा पार्टियों के निजी लाभ हानि से बड़ा है। आप और डीएमके इस बात पर राजी भी हैं कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव में कांग्रेस का साथ देंगे। आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी महाभियोग प्रस्ताव पर दस्तखत कर चुकी है।

दोनों पार्टियां इस मुद्दे के महत्व को समझ रही हैं फिर भी बैठक में नहीं शामिल हुईं। सबसे हैरान करने वाला रवैया समाजवादी पार्टी का था। उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक शामिल नहीं हुए। दिल्ली में पार्टी की सारी गतिविधियां संभालने वाले उनके चाचा रामगोपाल यादव भी बैठक में नहीं गए। यहां तक की अखिलेश के चचेरे भाई और कई बार के सांसद धर्मेंद्र यादव को भी अखिलेश ने बैठक में नहीं भेजा। सुबह के 11 बजे जिस समय बैठक शुरू हुई उसी समय अखिलेश यादव अपने चाचा रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह में काम करने वाले धनराज परिमल नाथवानी का राज्यसभा सीट के लिए नामांकन करा रहे थे। सोचें, नामांकन की आखिरी तारीख छह अक्टूबर है। लेकिन अखिलेश ने नामांकन के लिए वही दिन चुना, जिस दिन बैठक हो रही थी और समय भी वही चुना जब बैठक शुरू हुई। यह भी कहा गया कि लखनऊ में किसानों का एक सम्मेलन था, जिसमें अखिलेश को शामिल होना था। यह एक बहाना बना।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से जुड़े। जानकार सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे ने इशारों में कहा कि कांग्रेस को एकला चलो की नीति छोड़नी चाहिए। सहयोगी पार्टियों की दूरी का यही असली कारण है। कांग्रेस इन दिनों इस उत्साह में है कि उसका समय आ गया है और अब उसको किसी दूसरी पार्टी की जरुरत नहीं है। सोशल मीडिया में कांग्रेस इकोसिस्टम के लोग बता रहे हैं कि भाजपा के बुरे दिन चल रहे हैं। हालांकि यह बात तब कही जा रही है, जब चार महीने पहले ही भाजपा पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में बड़ी जीत हासिल की और असम व पुडुचेरी में एनडीए की सत्ता बचाई है। फिर भी यह बात कही जा रही है और कांग्रेस इस पर यकीन भी कर रही है। कांग्रेस को यह भी यकीन हो गया है कि मुस्लिम और दलित तो उसके साथ आ गया है और अब बाकी बहुजन का आना बाकी है। उसने तय कर किया है कि उसको सामान्य जातियों का वोट नहीं चाहिए। कांग्रेस के इस एटीट्यूड से परेशान पार्टियों ने उसको मैसेज दिया है। यह समझाया है कि कांग्रेस को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलने की कोशिश करनी चाहिए। जैसे सीपीएम ने बताया कि कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बैठक का न्योता ही नहीं दिया। यह बता था कि उसके नेता नहीं आएंगे। लेकिन जब कांग्रेस संसद में आप के साथ तालमेल बनाती है तो इस बैठक के लिए भी न्योता देना चाहिए था।

Tags :

By NI Political Desk

Get insights from the Nayaindia Political Desk, offering in-depth analysis, updates, and breaking news on Indian politics. From government policies to election coverage, we keep you informed on key political developments shaping the nation.

Leave a comment