अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान सात दिन तक चलेगा। इस सात दिन के अनुष्ठान के लिए अभी से तैयारी शुरू हो गई है। 16 जनवरी से शुरू हो रहे सात दिन के अनुष्ठान से पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या का दौरा करने की योजना है। वे 30 दिसंबर को नए हवाईअड्डे का उद्घाटन करेंगे और 15 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। प्रधानमंत्री 16 जनवरी से राम मंदिर कार्यक्रम के यजमान के तौर पर अनुष्ठान में शामिल होंगे। पहले दिन 16 जनवरी को यजमान यानी प्रधानमंत्री मोदी सरयू में स्नान करके सबसे पहले गणेश पूजन करेंगे और उसके साथ ही अनुष्ठान की शुरुआत होगी। अगले दिन यानी 17 जनवरी को मोदी और प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान सम्पन्न कराने वाले आचार्य रामलला की मूर्ति के साथ पंचकोशी क्षेत्र में शोभा यात्रा करेंगे। उसी दिन पूजन के लिए सरयू से जल लाया जाएगा।
यह तो तय है कि प्रधानमंत्री 16 और 17 जनवरी को अयोध्या में होंगे। उसके बाद मुख्य पूजा 22 जनवरी को होगी। बीच के चार दिन भी कोई न कोई अनुष्ठान होता रहेगा लेकिन यह तय नहीं है कि प्रधानमंत्री उसमें शामिल होंगे या नहीं। जनवरी को सुबह साढ़े 11 से साढ़े 12 के बीच पूजा होगा और प्राण प्रतिष्ठा होगी। बताया गया है कि जब रामलला की प्रतिमा स्थापित होगी और उनके नेत्र खुलेंगे उस समय प्रधानमंत्री मोदी रामलला के दाहिनी ओर खड़े होंगे। उनके साथ गर्भगृह में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद होंगे। पूजा कराने वाले मुख्य आचार्य पांचवें व्यक्ति होंगे, जो गर्भगृह में होंगे। प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बताया जा रहा है कि सिंहद्वार के सामने प्रधानमंत्री मोदी का एक भाषण भी होगा। इसके बाद 22 जनवरी के कार्यक्रम का समापन होगा। लेकिन उस दिन से भाजपा का अयोध्या दर्शन का अभियान शुरू होगा। पार्टी देश भर से लोगों को अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए ले जाएगी। अब सोचें, इससे जो नैरेटिव बनेगा क्या राहुल अपनी यात्रा से उसका जवाब दे पाएंगे?
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