आमतौर पर टेलीविजन चैनलों पर अब घोटालों की खबरें नहीं दिखाई जाती हैं। लेकिन अखबार अब भी ऐसी खबरें छाप रहे हैं। किसी भी दिन का अखबार खोलिए तो घोटाले ही घोटाले दिखेंगे सोचें, 12 साल पहले 2014 में भाजपा का पूरा प्रचार अभियान तत्कालीन यूपीए सरकार के कथित घोटालों को लेकर थे। ए टू जेड घोटाले की बात होती थी। भाजपा ने प्रचार किया कि कांग्रेस राज में आकाश से पाताल तक घोटाला हुआ है। उसी समय न खाऊंगा न खाने दूंगा का नारा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलंद किया था। लेकिन आज जिधर देखिए लोग सैकड़ों, हजारों करोड़ रुपए के घोटालों की खबरें आ रही हैं। पहले हुए घोटाले और उनकी जांच का मामला अलग है। इन सबका कॉमन कनेक्शन यह है कि ये सभी भाजपा शासित राज्य हैं।
इस समय जो घोटाले सबसे ज्यादा चर्चा में हैं उसमें एक अयोध्या का चढ़ावा चोरी का मामला है और दूसरी उज्जैन में जमीन खरीद का मामला है। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कितने करोड़ रुपए चढ़ावा चोरी हुआ इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। लेकिन दो करोड़ रुपए की बरामदगी और कुछ सोना मिलने की खबर आई है। चोरी का आंकड़ा आठ करोड़ से लेकर कई सौ करोड़ रुपए तक का है। चांदी की दो सौ ईंट गायब हो गई या चांदी का काग भुसुंडी गायब हो गया या निर्माण के समय भी गड़बड़ी हुई यह भी खबर आ रही है। लेकिन दो हफ्ते से ज्याद बीत जाने के बाद तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और अब खबर है कि जिनके ऊपर आरोप लगे वे सब मंदिर में लौट आए हैं।
उधर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद का मामला अलग तूल पकड़ रहा है। सीएम का परिवार पहले से रियल इस्टेट के कारोबार में है या कांग्रेस के नेता भी रियल इस्टेट के कारोबारी हैं, वाला दांव काम नहीं आ रहा है। पूछा जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव और उनके परिजनों ने 168 एकड़ जमीन उन्हीं इलाकों में कैसे खरीदी, जिन इलाकों में सरकारी विकास की परियोजनाएं आने वाली थीं, हाईवे बनने वाले थे या लैंड यूज बदला जाना था? ऐसा लग रहा है कि जैसे अयोध्या में किसी का कुछ नहीं हुआ वैसे ही उज्जैन में भी किसी का कुछ नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अलावा हरियाणा, गुजरात, बिहार, दिल्ली कोई भी राज्य अछूता नहीं है। हरियाणा इन दिनों आईडीएफसी बैंक घोटाले में फंसा हुआ है। आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल गिरफ्तार हुए हैं। आरोप है कि 170 करोड़ रुपए का सरकारी फंड आईडीएफसी बैंक में ट्रांसफर किया गया और वहां से पैसे फर्जी खातों के जरिए निकाल लिए गए। राजधानी दिल्ली में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट कमेटी में साढ़े छह सौ करोड़ रुपए के घोटाले की जांच शुरू हुई है। मेडिकल उपकरण खरीदने में यह घोटाला हुआ है। राजेश एक्सपोर्ट का 15 लाख करोड़ रुपए का फर्जी काराबोर दिखा कर किए गए घोटाले की जांच भी अब शुरू हो गई है। बिहार में रिशु श्री घोटाला चल रहा है। कई आईएएस अधिकारी इसमें फंसे हैं। दो आईएएस अधिकारियों के यहां छापे पड़े हैं, जिनको निलंबित किया गया है और एक अधिकारी फरार हैं। गिरफ्तार रिशु श्री के मोबाइल से सरकार के गोपनीय दस्तावेज मिल रहे हैं। कैबिनेट नोटिंग्स मिल रही हैं। मंजूरी से पहले ही कैबिनेट की फाइल उसके यहां पहुंचे होने की जानकारी आ रही है। वह हजारों करोड़ रुपए के टेंडर मैनेज करता था। नीतीश कुमार की सरकार के समय बहुत अहम मंत्रालयों में रहे आईएएस अधिकारी उसके लिए काम करते थे। मंत्रियों की मिलीभगत का खुलासा भी अभी होना है।


