एनडीए के भारी बहुमत से चुनाव जीतने के बाद से कहा जा रहा था कि इस बार सरकार में निरंतरता रहेगी। इसका मतलब है कि सरकार का जो स्वरूप पहले था वैसा ही रहने वाला है। फिर भी भारतीय जनता पार्टी ने अपने कोटे के कई बड़े मंत्रियों को मौका नहीं दिया। यह हैरान करने वाली बात है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं या पहली बार जिनको शपथ नहीं दिलाई गई उसमें कई बड़े नाम हैं। जैसे एक बड़ा नाम नीरज सिंह बबलू का है। वे कोशी क्षेत्र की छातापुर सीट से कई बार से जीत रहे हैं। राजपूत समाज से आते हैं और इस बात तो उनको उप मुख्यमंत्री बनाने की बात हो रही थी लेकिन मंत्री भी नहीं बन पाए। वे नीतीश सरकार में पेयजल व स्वच्छता विभाग के मंत्री थे।
इसी तरह नीतीश कुमार की सरकार में उद्योग मंत्री के तौर पर बहुत शानदार काम कर रहे नीतीश मिश्रा भी मंत्री नहीं बन पाए। वे बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र के बेटे हैं। मिथिला की झंझारपुर सीट से जीते हैं। वे 50 हजार से ज्यादा वोट से जीतने वाले विधायकों में शामिल हैं। इसी तरह दरभंगा शहर की सीट से जीते संजय सरावगी को भी मौका नहीं मिला है। वे नीतीश सरकार में मंत्री थे। भाजपा कोटे से नीतीश सरकार के एक अन्य मंत्री कृष्णनंदन पासवान भी मंत्री बनने से चूक गए हैं। राजू सिंह का नाम भी कट गया तो विवादों में घिरे जीवेश मिश्रा का नाम भी कट गया।
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