संसद का शीतकालीन सत्र प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम रहा। सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पास हुए, कई बड़े विषयों पर चर्चा हुई और संसद परिसर में भी खूब राजनीति हुई लेकिन 19 दिन के इस छोटे से सत्र में हर तरफ प्रियंका की चर्चा रही। वे सिर्फ डेढ़ साल पहले संसद में पहुंची हैं। उन्होंने वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान संसद में कहा कि नरेंद्र मोदी 12 साल से प्रधानमंत्री हैं और वे 12 महीने पहले संसद में आई हैं। सत्र में उनके भाई और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की गैरहाजिरी से भी प्रियंका को मौका मिला। उन्होंने कमान संभाली और हर बहस को दिशा दी। यह पहला मौका है, जब सत्र के दौरान विपक्षी पार्टियों ने इतनी गंभीरता से उनको नोटिस किया है। प्रियंका गांधी स्टाइल ऑफ पोलिटिक्स की बातें सत्र के दौरान नेताओं व पत्रकारों की अनौपचारिक चर्चाओं में शुरू हुई हैं।
शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद शुक्रवार को स्पीकर के चैम्बर में होने वाली औपचारिक चाय पार्टी में विपक्ष के नेताओं के साथ प्रियंका भी शामिल हुईं। वहां उनको पर्याप्त अटेंशन मिल। ध्यान रहे राहुल ऐसी औपचारिक बैठकों में नहीं जाते हैं। लेकिन प्रियंका गईं और राजनाथ सिंह के साथ बैठीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बैठक में थे और दोनों के बीच संवाद भी हुआ। प्रियंका ने उनसे विदेश दौरे के बारे में पूछा और प्रधानमंत्री ने खुशी खुशी अपना अनुभव बताया। प्रियंका ने हल्की फुल्की बातें कहीं, जिनसे माहौल खुशनुमा बना। उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी कहीं, जिन पर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और दूसरे लोग खुल कर हंसे। लेकिन उन्हीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने स्पीकर के चैम्बर से बाहर सरकार पर जम कर हमला किया। उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में बिल लाती है और हड़बड़ी में उसे पास कराती है। उन्होंने रोजगार गारंटी बिल से महात्मा गांधी का नाम हटाने के लिए सरकार की खूब आलोचना की।
इससे पहले प्रियंका गांधी वाड्रा सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलने गई थीं। वे अपने चुनाव क्षेत्र के किसी काम के लिए गई थीं लेकिन यह बड़ी खबर बनी। उन्होंने बाद में गडकरी के कामकाज की तारीफ भी की। इस सत्र में वंदे मातरम् पर प्रधानमंत्री मोदी ने डेढ़ घंटे का भाषण दिया। चुनाव सुधारों पर अमित शाह खूब बोले। लेकिन असली चर्चा प्रियंका के भाषण की हुई, जो उन्होंने वंदे मातरम् पर दी। प्रियंका ने बहुत सहज तरीके से सदन को संबोधित किया। उनका भाषण संवाद की शैली में था। ऐसा लग रहा था कि वे सदन में मौजूद सदस्यों और संसद टीवी के जरिए उन्हें देख रहे लोगों से संवाद कर रही हैं। उन्होंने बिना कटुता लाए प्रधानमंत्री की आलोचना की और उनके भाषण के तथ्यों को खारिज करके अपने तथ्य रखे। संसद के बाहर रामलीला मैदान में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली में भी उनके भाषण की खूब तारीफ हुई है। प्रदूषण के मसले पर या दूसरे किसी भी मसले पर संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए भी उनकी प्रतिक्रिया बहुत सधी हुई थी। तभी संसद के शीतकालीन सत्र को प्रियंका का सत्र कहा जा रहा है। भाजपा के नेता राहुल पर तंजे करते हुए कह रहे हैं कि उनको इतनी बार लॉन्च करने का प्रयास हुआ लेकिन कामयाबी नहीं मिली, जबकि प्रियंका सहज रूप से अपनी जगह बना रही हैं। कांग्रेस में भी नेता राहुल और प्रियंका की तुलना करने लगे हैं।


