बिहार में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से चार सीटों पर एनडीए की जीत तय है। इसमें से दो सीटें भाजपा को और दो जनता दल यू को मिलेंगी। लेकिन पांचवीं सीट पर चुनाव होने की संभावना है। वैसे राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा कह रहे हैं कि पांचवीं सीट पर भी चुनाव नहीं होगा क्योंकि महागठबंधन के पास संख्या नहीं है इसलिए वह उम्मीदवार नहीं उतारेगा। लेकिन महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। गौरतलब है कि बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व कर रही राजद के दो सांसद रिटायर हो रहे हैं। पिछले 30 साल से राज्यसभा जा रहे प्रेमचंद गुप्ता और ए टू जेड समीकरण के तहत 2020 में राज्यसभा गए भूमिहार जाति के अमरेंद्र धारी सिंह। अगर ओवैसी की पार्टी के पांच सदस्य साथ दें और महागठबंधन एकजुट रहे तो पांचवीं सीट महागठबंधन को मिल सकती है। अमरेंद्र धारी सिंह भी लगे हुए हैं और कई मुस्लिम उम्मीदवार भी जोर आजमाइश के लिए तैयार हैं।
परंतु जानकार सूत्रों का कहना है कि प्रेमचंद गुप्ता बिहार से लड़ने की जोखिम नहीं लेंगे। उन्होंने एक बार फिर अपनी सुरक्षित गोटी बैठा ली है। वे फिर से झारखंड जा सकते हैं। ध्यान रहे इससे पहले वे झारखंड से राज्यसभा में रहे हैं। उस समय कांग्रेस ने उनको उच्च सदन में भेजने में सहयोग किया था। इस बार फिर झारखंड में उनके नाम की चर्चा है, जहां मई में चुनाव होंगे। असल में झारखंड में जेएमएम के नेतृत्व वाले गठबंधन को 56 विधायकों का समर्थन है। दोनों सीटें जीतने के लिए इतने ही वोट की जरुरत है। लेकिन इसमें 16 सीटें कांग्रेस की, चार राजद की और दो लेफ्ट की हैं। यानी 22 सीटें सहयोगी पार्टियों की हैं। पिछले तीन चुनाव से कांग्रेस अपने लिए एक सीट मांग रही है। लेकिन हेमंत सोरेन ने सीट नहीं दी। इस बार भी कांग्रेस सीट मांग रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि विपक्षी के साझा उम्मीदवार के तौर पर प्रेमचंद गुप्ता फिर से झारखंड से राज्यसभा जा सकते हैं। वैसे कांग्रेस अभी अपने उम्मीदवार के लिए अड़ी है।


