महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की समस्याएं समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी टूटने के बाद का घटनाक्रम उनके लिए मिश्रित था। उनकी पार्टी और गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में बहुत शानदार प्रदर्शन किया लेकिन विधानसभा चुनाव में हार गए। वहां तक ठीक था। लेकिन बृहन्नमुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी का चुनाव हारने के बाद उनकी पार्टी में बिखराव की संभावना बढ़ गई थी। ध्यान रहे शिव सेना की असली ताकत बीएमसी और उसके पार्षद हैं। बीएमसी चुनाव में उनकी पार्टी जीती भले नहीं लेकिन अच्छा प्रदर्शन किया।
परंतु अच्छे प्रदर्शन से कुछ नहीं होता है। केंद्र, राज्य और बीएमसी तीनों पर भाजपा का नियंत्रण है तो शिव सेना के पार्षद कोई काम नहीं कर सकते हैं। विधायक और सांसद भी अपने क्षेत्र में काम कराने के लिए भाजपा पर ही निर्भर हैं। तभी बीएमसी चुनाव के तीन महीने बीतते ही टूट का सिलसिला शुरू हो गया। पार्टी के छह सांसद बागी होकर एकनाथ शिंदे की पार्टी के साथ चले गए हैं। अब कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के 20 में से 15 या 16 विधायक भी पाला बदल सकते हैं और 65 पार्षदों में से भी ज्यादतर पाला बदलने की तैयारी में हैं। इस संकट को भांप कर उद्धव ठाकरे ने एक भावुक अपील की है। उन्होंने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस समारोह में कहा कि अगर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता उनके काम से संतुष्ट नहीं हैं तो वे पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार हैं।
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