यह कमाल की बात है कि दिल्ली पुलिस की एक टीम रविवार की रात को दिल्ली के हिमाचल भवन में पहुंच गई थी। दिल्ली पुलिस की टीम रात 12 बजे के बाद पहुंची थी। पुलिस क्या खोज रही थी यह पता नहीं है लेकिन इसे लेकर बड़ा विवाद हो गया है। आमतौर पर पुलिस किसी राज्य के भवन में छापा मारने नहीं जाती है। अगर ऐसी जरुरत पड़ जाए तो उस राज्य की सरकार और पुलिस को पहले से भरोसे में लेना होता है। लेकिन यहां दिल्ली पुलिस ने किसी को कुछ बताने और सहयोग लेने का प्रयास नहीं किया। पुलिस सीधे हिमाचल भवन पहुंची और लोगों के कमरों में घुस कर तलाशी करने लगी। एक महिला ने पुलिस को रोका और नाराजगी जताई कि वह कैसे उनके कमरे में घुसी। इसके बाद पुलिस चुपचाप चली गई।
अब सवाल है कि हिमाचल प्रदेश भवन में घुस कर दिल्ली पुलिस क्या तलाश रही थी? कहा जा रहा है कि प्रगति मैदान के भारत मंडपम में कपड़े उतार कर प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की तलाश में दिल्ली पुलिस वहां पहुंची थी। क्या यह इतना बड़ा मामला है? पुलिस इस मामले में आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। उनको रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। फिर ऐसी कार्रवाई की क्या जरुरत थी? उधर हिमाचल प्रदेश के भाजपा नेता इसे दूसरा ही रंग दे रहे हैं। वे इसे ऐसे प्रस्तुत कर रहे हैं, जैसे इधर उधर के सस्ते होटलों में पुलिस जिन बातों के लिए छापे मारती है वैसी किसी बात के लिए हिमाचल प्रदेश भवन में छापा मारा गया। पुलिस को इस मामले में स्पष्टता लाने की जरुरत है और भवनों को लेकर कुछ स्पष्ट नियम बनाने की भी जरुरत है।
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