केंद्र सरकार किस्तों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ा रही है। ऐसा लग रहा है जैसे धीरे धीरे करके कीमत बढ़ाने से लोगों को इसका असर नहीं महसूस होगा। यह आंख में धूल झोंकने का सरकारों का जो तरीका रहा है वही है। पहले चुनाव के कारण दो महीने तक कीमतें स्थिर रखी गईं और उसके बाद किस्तों में दाम बढ़ाया जा रहा है। सोचें, जब सार्वजनिक रूप से भाजपा के समर्थक कह रहे हैं कि कीमत चाहे कितनी भी बढ़ जाए वे भाजपा को ही वोट करेंगे फिर सरकार किसकी परवाह कर रही है? एक ही बार में तेल की कीमत में 10 या 12 रुपए की बढ़ोतरी कर दे। उससे क्या फर्क पड़ जाएगा!
इसकी बजाय सरकार ने 15 मार्च को पेट्रोल व डीजल की कीमत में तीन रुपए लीटर की और सीएनजी की कीमत में दो रुपए किलो की बढ़ोतरी की। उसके बाद दो किस्तें और लोगों के ऊपर पड़ी हैं। इसका कुल नतीजा यह है कि नौ दिन में पेट्रोल 4.87 रुपए और डीजल 4.91 रुपए लीटर महंगा हुआ है। फिर भी कहा जा रहा है कि अब भी छह सौ करोड़ रुपए रोज का नुकसान हो रहा है। इसका अर्थ है कि इससे ज्यादा बढ़ोतरी के लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए। इस बढ़ती कीमत का असर रोजमर्रा की जरुरत की हर वस्तु में दिखनी शुरू होगी। लोगों के इस बात की भी परेशानी है कि कीमत बढ़ाने के बावजूद पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। कई जगह राशनिंग हो रही है और लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। बिहार से एक तस्वीर आई थी कि लोग पेट्रोल पंप पर मच्छरदानी लगा कर सो रहे हैं।
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