अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर रोज नई कहानियां आ रही हैं। इस पर सबसे लोकप्रिय वेब सीरीज ‘मनी हाइस्ट’ जैसा कोई सीरियल बन सकता है। बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ साल पहले महाकुंभ समाप्त होने के बाद से ही मंदिर में चोरी चल रही है और इसकी खबर दिल्ली, लखनऊ और नागपुर सब जगह पहुंची हुई थी। यह भी कहा जा रहा है कि संघ की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को आगाह भी किया गया था। लेकिन वे मान रहे थे कि मंदिर निर्माण के आंदोलन का चूंकि विश्व हिंदू परिषद ने नेतृत्व किया है इसलिए मंदिर उसकी संपत्ति है और वे विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं तो कुछ भी कर सकते हैं।
यह भी खबर है कि संघ की ओर से विहिप के जो पालक अधिकारी हैं वो भैयाजी जोशी हैं और उनका कोई बहुत अच्छा संबंध चंपत राय से नहीं है। भाजपा नेताओं की ओर से भी अनौपचारिक बातचीत में बताया जा रहा है कि कैसे विहिप पर वैश्य समाज के लोगों ने नियंत्रण किया है। सो, यह कहानी नेताओं के ईगो, जातीय समीकरण और दिल्ली, नागपुर व लखनऊ के सत्ता समीकरण से भी जुड़ी है। इस बीच यह पता चला है कि लखनऊ से एक स्टिंग ऑपरेशन प्लान किया गया था। एक व्यक्ति को एक निश्चित रकम लेकर मंदिर में भेजा गया। उसने दानपात्र में वह रकम डाली। लेकिन उस दिन का जो पूरा चढ़ावा बैंक में जमा हुआ वह उस दान की रकम से भी कम था। इससे कन्फर्म हुआ कि चोरी हो रही है। जांच हुई है तो कई और कहानियां सामने आई हैं। पता चला है कि प्रति भक्त औसतन पांच रुपए का चढ़ावा मंदिर में दिखाया जा रहा है। बहरहाल, अब मंदिर में नई व्यवस्था बनेगी और यह देखना होगा कि उसमें विश्व हिंदू परिषद का कितना अधिकार रहता है।
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