केंद्र सरकार को भ्रष्टाचार के मसले पर देश के लोगों को एक मैसेज देना है। इसलिए दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला चलेगा। उनके खिलाफ संसद की जांच समिति की रिपोर्ट आ गई है। जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार इसको जाया नहीं होने देगी। कहा जा रहा है कि संसद के शीतकालीन सत्र में महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उनके खिलाफ महाभियोग चलेगा और हटाया जाएगा। ध्यान रहे आज तक देश के किसी भी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज को महाभियोग के जरिए नहीं हटाया गया है। यह पहला मौका हो सकता है जब हाई कोर्ट के जज को भ्रष्टाचार के आरोप में महाभियोग के जरिए हटाया जाए। संसद की बनाई जांच कमेटी ने जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोपों को सही पाया है।
उनके ऊपर मुख्य आरोप यह है कि जब वे दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे तब उनके आवास के स्टोररूम में पांच पांच सौ रुपए के नोटों के गड्डियां बोरे में भरी हुई मिली थी। वे इस पर पहले सुप्रीम कोर्ट की समिति की भी संतुष्ट नहीं कर पाए थे और बाद में संसद की समिति को भी संतुष्ट नहीं कर पाए। उन्होंने हालांकि इस्तीफा दे दिया है लेकिन कानून के जानकारों का कहना है कि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया है इसलिए महाभियोग चलता रहेगा। हालांकि कुछ जानकार कह रहे हैं कि उनका इस्तीफा हो गया है तो महाभियोग की प्रक्रिया बंद होनी चाहिए। लेकिन तकनीकी स्थिति यह है कि राष्ट्रपति ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। इससे भी लग रहा है कि सरकार मामले को रफा दफा होने देने के मूड में नहीं है।
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