राजनीतिक और चरमपंथी दोनों तरह के लेफ्ट का सफाया होने का संकेत है। 31 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के नक्सलवाद से मुक्त होने का ऐलान किया और चार मई को लेफ्ट पार्टियों का एकमात्र केरल का गढ़ भी ढह गया। वामपंथी पार्टियां पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा से पहले ही साफ हो चुकी हैं। केरल में लगातार 10 साल सरकार में रहने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाले वामपंथी गठबंधन की करारी हार हुई है। उसे कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने बड़े अंतर से हराया है। बिहार में लेफ्ट को पहले झटका लगा था और इस बार तमिलनाडु में भी लेफ्ट पार्टियां कुछ खास नहीं कर पाईं। सो, देश में लेफ्ट की राजनीति के लिए चिंता की बात है।
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