दक्षिण भारत में फिल्मी सितारों का जलवा कम हो गया था। वे राजनीति में आते तो थे पर कामयाब नहीं हो पाते थे। तमिलनाडु में कैप्टेन विजयकांत ने 2005 में डीएमडीके पार्टी बनाई और चुनाव में उतरे लेकिन कुछ नहीं कर पाए। कमल हसन ने पार्टी बनाई लेकिन कोई चमत्कार नहीं दिखा सके। रजनीकांत ने भी पहल की लेकिन वे पीछे हट गए। आंध्र प्रदेश में चिरंजीवी ने पार्टी बनाई लेकिन बुरी तरह से पिट गए। केरल में सुरेश गोपी भी पार्टी बना कर उतरे लेकिन कामयाबी नहीं मिली। तभी ऐसा लग रहा था कि एमजी रामचंद्रन या जयललिता या एनटी रामाराव जैसा अब कोई नहीं निकलेगा, जो पार्टी बनाए और जनता उसे सीधे मुख्यमंत्री बना दे।
फिल्म स्टार विजय ने इस ट्रेंड को बदला है। उन्होंने दो साल पहले पार्टी बनाई थी और 2024 में पार्टी बनाते हुए ऐलान किया था कि वे 2026 का चुनाव लड़ेंगे। उसके बाद उनकी पहली राजनीतिक रैली में करूर में भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग मर गए। उसके बाद सीबीआई ने उनसे कई बार पूछताछ की। उनकी एक सीमा यह थी कि उनके पास कोई संगठन नहीं था और दूसरे वे ईसाई समुदाय से आते हैं। अन्ना डीएमके और भाजपा से तालमेल की बात भी चल रही थी लेकिन वह कामयाब नहीं हो सकी। उनकी पार्टी की ओर से कहा गया कि चुनाव लड़ने लायक अच्छे उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। लेकिन उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा और दोनों द्रविडियन पार्टिय़ों यानी डीएमके और अन्ना डीएमके को हरा दिया। उनकी पार्टी अकेले बहुमत के नजदीक पहुंच गई है। तभी ऐसा लग रहा है कि इसके बाद एक बार फिर दक्षिण के राज्यों में फिल्मी सितारों का आत्मविश्वास लौटेगा।


