यह बड़ा सवाल है क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान संकेत तो बहुत दिए गए लेकिन किसी जगह पर कहा नहीं गया कि भाजपा चुनाव जीतेगी तो शुभेंदु अधिकारी ही मुख्यमंत्री बनेंगे। भाजपा के बारे में यह आम धारणा है कि वह इस बात की परवाह नहीं करती है कि कोई नेता बाहर से आय़ा है या पारंपरिक रूप से भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ा हुआ है। भाजपा का मानना है कि अगर कोई नेता पार्टी में आ गया तो उसने भाजपा की विचारधारा स्वीकार कर ली इसलिए उसे मुख्यमंत्री या केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्वी और पूर्वोत्तर के राज्यें में तो ऐसा बहुत देखने को मिला है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी कांग्रेस से आए हैं और पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्यों में भाजपा सरकारों के मुख्यमंत्री दूसरी पार्टियों के हैं।
तभी कई नेता मान रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी ही मुख्यमंत्री होंगे। उनको भाजपा ने पिछले चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष बनाया था। तब उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराया था। इस बार उनको दो सीटों से लड़ाया गया। नंदीग्राम के अलावा वे भबानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ लड़े। इससे संकेत तो गया कि वे सीएम पद के दावेदार हैं। लेकिन क्या भाजपा उनको सीएम बनाएगी? उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं। नारदा स्टिंग ऑपरेशन में उनका नाम आया था। बंगाल में भाजपा के पास अपने दिलीप घोष, शामिक भट्टाचार्य, सुकांत मजूमदार जैसे अनेक नेता हैं, जो सीएम पद की दावेदारी कर रहे हैं। यह भी एक दिलचस्प संयोग है कि भाजपा के अपने जीते नेता दावेदार हैं वे सब अगड़ी जाति से आते हैं, जबकि शुभेंदु अधिकारी ओबीसी समुदाय से आते हैं। पश्चिम बंगाल में अभी तक कोई ओबीसी मुख्यमंत्री नहीं बना है। अगर शुभेंदु अधिकारी बनते हैं तो वे पहले ओबीसी मुख्यमंत्री होंगे।


