एक एक करके देश की क्षेत्रीय पार्टियों के सामने संकट बढ़ता जा रहा है। इस बार विधानसभा चुनाव में दो बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों को झटका लगा है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस चुनाव हार कर सत्ता से बाहर हुई है तो तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टी न सिर्फ चुनाव हारी है, बल्कि तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। इससे पहले हुए बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल 25 सीट पर सिमट गई तो नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू भी अब डांवाडोल स्थिति में है क्योंकि वहां भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री बना लिया है।
उससे पहले हुए चुनाव में दिल्ली में आम आदमी पार्टी चुनाव हार कर सत्ता से बाहर हुई तो पंजाब में भी उसको बड़ा झटका लगा है। उसके छह राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ गए हैं। उससे पहले के चुनाव में ओडिशा में बीजू जनता दल 25 साल के बाद सत्ता से बाहर हुई और अब पार्टी के अंदर बिखराव साफ दिख रहा है। बिहार में नीतीश कुमार और ओडिशा में नवीन पटनायक दोनों की उम्र और सेहत साथ नहीं है। इसी तरह महाराष्ट्र में शिव सेना और एनसीपी दोनों में टूट हो गई और टूटने के बाद दोनों पार्टियां कमजोर हुई हैं। एक तरह से भाजपा के ऊपर आश्रित हुई हैं। तेलंगाना में बीआरएस और आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस की स्थिति भी अच्छी नहीं है।


