चुनाव रणनीति बनाने और प्रबंधन करने वाली कंपनी आईपैक के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अभी फिलहाल तो प्रतीक जैन ही निशाने पर हैं, जो अभी कंपनी की बागडोर संभाल रहे हैं और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी के लिए चुनाव प्रबंधन का काम कर रहे हैं। लेकिन इसकी आंच प्रशांत किशोर तक भी पहुंच सकती है, जो इस कंपनी के संस्थापक हैं। ध्यान रहे प्रशांत किशोर ने 2021 में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को चुनाव लड़वाया था और डंके की चोट पर जीत सुनिश्चित कराई थी। उसके थोड़े दिन बाद ही उन्होंने चुनाव प्रबंधन का काम छोड़ दिया और बिहार में सक्रिय राजनीति में उतर गए।
पिछले दिनों ईडी ने आईपैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था। उसका आरोप है कि कोयले की अवैथ तस्करी की कमाई हवाला के जरिए आईपैक को दी गई है। इस मामले की जांच के बाद अब एक एक करके नई खबरें सामने आने लगी हैं। एक खबर यह है कि 2021 में आईपैक को हरियाणा के रोहतक में स्थित एक कंपनी ने आईपैक को साढ़े 13 करोड़ रुपए का चंदा दिया था। लेकिन जांच में पता चला है कि इस नाम की कंपनी का वजूद ही नहीं है। मीडिया में इसकी खबर आ गई है। माना जा रहा है कि इस तरह की और भी खबरें आएंगी। ध्यान रहे बिहार चुनाव से समय भी प्रशांत किशोर को ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा था। अब नए सवाल उनको ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
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