महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों का पहले चरण विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी के लिए बड़ा झटका रहा। कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिव सेना और शरद पवार की एनसीपी को मिला कर 286 में से 50 सीटें नहीं मिलीं। ग्रामीण निकायों के चुनाव का नतीजा लगभग विधानसभा चुनाव की तरह रहा। सत्तारूढ़ महायुति को 217 सीटें मिलीं। तभी उद्धव ठाकरे की पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दावा किया कि ईवीएम पहले जैसा ही सेट था इसलिए विधानसभा जैसा रिजल्ट आया है। हालांकि किसी ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। शरद पवार की बेटी और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि भाजपा अपने दम पर नहीं, बल्कि दूसरी पार्टियों से आए नेताओं के दम पर जीती है। उन्होंने सतारा के नतीजों का हवाला भी दिया।
इस नतीजे ने विपक्षी पार्टियों को अपने गठबंधन के बारे में नए सिरे से सोचने को मजबूर कर दिया है। नगर पंचायतों और नगर परिषदों के चुनाव नतीजों से पहले कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्निथला ने ऐलान किया था कि बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ेगी। अब इस पर नए सिरे से विचार हो रहा है। संजय राउत ने बताया जा रहा है कि राहुल गांधी से बात की है। हालांकि यह भी हैरानी की बात है कि उद्धव ठाकरे ने बात क्यों नहीं की या राउत ने चेन्निथला से बात करने की बजाय सीधे राहुल से कैसे बात की। लेकिन इसकी चर्चा है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी चाहती है कि कांग्रेस साथ आए। दूसरी ओर कांग्रेस किसी हाल में राज ठाकरे के साथ नहीं दिखना चाहती है, जिनसे उद्धव ने तालमेल लगभग फाइनल कर लिया है। सो, अब फिर एक बार शरद पवार की मध्यस्थता की जरुरत है। बीएमसी में शरद पवार का कुछ भी दांव पर नहीं है लेकिन कांग्रेस का बड़ा आधार है।
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