महिला आरक्षण लागू करने की जल्दबाजी दिखा रही है कि केंद्र सरकार और भाजपा की नजर में पश्चिम बंगाल का चुनाव भी है। ध्यान रहे पश्चिम बंगाल मातृ शक्ति का वंदन करने वाला राज्य है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद को इसके प्रतीक के तौर पर पेश करती हें। उन्होंने इस बार के विधानसभा चुनाव में महिला सशक्तिकरण का मैसेज देने के लिए ही महिला आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती को राज्य का मुख्य सचिव बनाया था। हालांकि चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू होते ही उनको पद से हटा दिया। ममता बनर्जी चुनाव प्रचार में इसका मुद्दा बना रही हैं।
ऐसा लग रहा है कि और तृणमूल कांग्रेस के नेता इस बात को कह भी रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में इस बात का क्रेडिट लेने का प्रयास करेंगे कि उन्होंने महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू कर दी। तृणमूल का मानना है कि इससे अलावा जल्दबाजी का कोई दूसरा कारण समझ में नहीं आता। तभी तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेता यह भी चाहते थे कि संसद के चालू बजट सत्र में महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन कानून, 2023 में संशोधन का बिल नहीं पास किया जाए। वे चाहते हैं कि इसके लिए अलग विशेष सत्र बुलाया जाए, जो पांच राज्यों के चुनाव के बाद हो। हालांकि महिलाओं को आरक्षण देने का कानून टालने के लिए दबाव बनाना पार्टी के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है। इसलिए परदे के पीछे से इसके प्रयास हो रहे हैं। अगर इसी सत्र में यानी दो अप्रैल से पहले बिल पास हो गया कि 2029 से महिला आरक्षण लागू हो रहा है तो फिर भाजपा इसको बंगाल चुनाव में भुनाने की भरपूर कोशिश करेगी।
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