ऐसा नहीं है कि अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार में मंत्री रहे सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार से जुड़े हर मामले में राहत मिल गई है। उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों मे से एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई है। यह मामला गलत तरीके से नियुक्ति और दूसरे विभाग का पैसा खर्च करने से जुड़ा था। उनके खिलाफ असली मामला शराब घोटाले का है, हवाला के जरिए लेन देन का है, अस्पतालों के निर्माण से जुड़ा है। इस बीच उनके खिलाफ साढ़े छह सौ करोड़ रुपए के एक और कथित घोटाले का मामला उनके ऊपर दर्ज हो गया है। इसलिए उनकी जान सांसद में फंसी रहने वाली है।
फिर सवाल है कि एक मामले में भी उनको राहत कैसे मिली और इसका क्या मतलब है? आमतौर पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच में किसी विपक्षी पार्टी के नेता को राहत तभी मिलती है, जब वह भाजपा में शामिल हो जाता है। लेकिन सत्येंद्र जैन भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं और न भाजपा के समर्थन में बयान दे रहे हैं। फिर भी भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई है तो यह बहुत बड़ी बात है। यह एकमात्र मामला नहीं है, जिसमें सीबीआई को सबूत नहीं मिले। हैरानी की चार साल में ही सीबीआई थक गई और कहा कि सबूत नहीं हैं, जबकि उसके कई मामले बीसों साल से चल रहे हैं। इसलिए कुछ न कुछ तो बात है, जिसकी वजह से सत्येंद्र जैन को राहत मिली है। ऐसा लग रहा है कि उनको और भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे अन्य नेताओं को यह संदेश दिया गया है कि इसी तरह राहत मिल सकती है।
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