अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला लौट आए हैं। उनको अब रोजमर्रा के कामकाज के साथ दो अहम मसलों पर फैसला करना है। उनके सामने राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से पेश किया गया सब्सटेंसिव मोशन है और विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन का मामला है। गौरतलब है कि बजट सत्र के पहले चरण में निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ बिना सबूत बात कहने, देश विरोधी ताकतों से संपर्क रखने और दूसरे कई आरोपों में सब्सटेंसिव मोशन पेश किया था। पहले इस तरह के मोशन के आधार पर सांसदों को हटाया जा चुका है। हालांकि ऐसा लग नहीं रहा है कि सरकार राहुल गांधी को हटाना चाहेगी। लेकिन संभव है कि मामले कमेटी को भेज कर उसकी रिपोर्ट के आधार पर राहुल की निंदा हो।
दूसरी ओर सदन से निलंबित आठ सांसद लगातार मकर द्वार की सीढ़ियों पर बैठ कर प्रदर्शन करते हैं। बजट सत्र के पहले चरण में भी वे प्रदर्शन करते रहे थे। अब भी उनका प्रदर्शन चल रहा है। उनके मामले में भी लग नहीं रहा है कि अभी तुरंत स्पीकर कोई फैसला करेंगे। इस सत्र के बचे हुए हिस्से में उनकी वापसी मुश्किल लग रही है। हालांकि अगर विपक्ष लोकसभा के सुचारू संचालन के लिए स्पीकर के सामने सरकार के संसदीय प्रबंधकों से बात करे तो कुछ रास्ता निकल सकता है। अगर रास्ता नहीं निकलता है तो आठ निलंबित सांसदों में से चार चुनाव प्रचार के लिए जा सकते हैं। उनके राज्य में विधानसभा का चुनाव होना है। इसलिए संसद की सीढ़ियों पर बैठे रहने से बेहतर चुनाव के काम में लगना होगा। दोनों मामलों में क्या होगा यह सोमवार तक पता चलेगा।


