बिहार में महिला वोट की चर्चा होती है। प्रवासी वोट की भी चर्चा होती है। मुस्लिम और यादव को लेकर तो माई समीकरण बना हुआ है। अति पिछड़ा वोट की बात भी होती है और यहां तक कि सिर्फ नौ फीसदी आबादी वाले सवर्ण वोट की भी चर्चा होती है। लेकिन युवाओं की बात अलग से कोई नहीं करता है। कुछ समय पहले चिराग पासवान ने जरूर कहा था कि वे भी एक एमवाई समीकरण पर काम कर रहे हैं, जिसमें एम का मतलब महिला और वाई का मतलब युवा है। लेकिन चूंकि बातों के अलावा चिराग पासवान कभी कुछ करते नहीं हैं इसलिए उनकी इस बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। उलटे बिहार में यह चर्चा होती है कि उनके लिए महिला का मतलब किसी धनपति या बाहुबली की पत्नी, बेटी है और युवा का मतलब किसी नेता या बाहुबली का बेटा है।
बहरहाल, बिहार में साढ़े तीन करोड़ के करीब महिलाएं हैं और एक करोड़ 70 लाख युवा हैं। थोड़ी उम्र सीमा बढ़ा दी जाए तो यह संख्या बढ़ जाएगी। यह एक करोड़ 70 लाख की आबादी 18 से 28 साल के उम्र वालों की है। ध्यान रहे ‘जेन जी’ में 13 से 28 साल के युवाओं को रखा जाता है। लेकिन 18 साल से कम उम्र के युवा या किशोर वोट नहीं कर सकते हैं इसलिए 18 से 28 साल वालों की संख्या निकाली गई है। यह एक करोड़ 70 लाख है। ये युवा बिहार की तस्वीर बदल सकते हैं। इनमें से 14 लाख तो ऐसे हैं, जो पहली बार वोट करेंगे। इस आंकड़े को ऐसे भी कह सकते हैं कि बिहार की हर सीट पर 57 सौ मतदाता ऐसे हैं, जो 18 से 19 साल के हैं और पहली बार मतदान करेंगे। पिछले चुनाव में 52 सीटों का फैसला पांच हजार से कम मतों से हुआ था। दुर्भाग्य से कोई भी पार्टी इनको अलग वोट वर्ग मान कर इनको अपनी ओर करने का प्रयास नहीं कर रही है।
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