Bihar Election

  • बिहार में राज्यसभा की जोड़ तोड़ शुरू

    बिहार विधानसभा चुनाव के बाद पहला सत्र संपन्न हो गया है और अब राज्यसभा के साथ साथ विधान परिषद की सीटों पर जोड़ तोड़ शुरू हो गई है। बिहार का मामला इसलिए दिलचस्प है क्योंकि राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश भी वहां से सांसद हैं। उनका कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म हो रहा है। क्या जनता दल यू की ओर से उनको फिर से राज्यसभा भेजा जाएगा? वे दो बार उच्च सदन के सदस्य रह चुके हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि उनको तीसरी बार भेजने की संभावना बहुत कम है। ध्यान रहे पिछले कई सालों से उनको...

  • विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए लामबंदी

    पटना, भाषा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मंत्रियों को विभाग बांटने के एक दिन बाद विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर राजग में सक्रिय लामबंदी शुरू हो गई है। राजग सूत्रों के अनुसार, गया टाउन से लगातार नौवीं बार चुने गए भाजपा विधायक प्रेम कुमार अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हैं, क्योंकि वे पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। जद (यू) के झाझा से विधायक दामोदर रावत का नाम भी चर्चा में है। सूत्रों ने कहा कि जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा, जिसमें सभी 243 नवनिर्वाचित सदस्य शपथ लेंगे और अध्यक्ष का चुनाव होगा।...

  • प्रचार के समय नीतीश चंगे!

    नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने हैं। जबकि तीन महीने पहले लग रहा था कि वे प्रचार नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनकी सेहत ठीक नहीं लग रही थी। असल में उनकी सेहत को लेकर पिछले दो साल से तरह तरह की खबरें आई है। उन खबरों को प्रमाणित करने वाले वीडियो भी आए। नीतीश कुमार लोगों को पहचान नहीं पाते थे या नाम भूल जाते थे या अजीबोगरीब व्यवहार करते थे। उनके ऐसे ही व्यवहार के कारण हर सोमवार को लगने वाला उनका जनता दरबार बंद कर दिया गया। एक दिन जनता दरबार में वे बार बार गृह मंत्री को...

  • हार की ईमानदार समीक्षा नहीं

    विधानसभा चुनाव के नतीजों के तीन दिन बाद सोमवार, 17 नवंबर को राष्ट्रीय जनता दल ने हार की समीक्षा की। सभी हारे हुए उम्मीदवारों को पटना बुलाया गया और उनसे बात की गई। जीते विधायकों के साथ भी समीक्षा हो रही है। इसके बाद मंगलवार को कांग्रेस पार्टी समीक्षा करेगी। लेकिन उससे पहले राजद की समीक्षा से अंदाजा हो गया है कि कोई ईमानदार बातचीत नहीं होने वाली है। सभी उम्मीदवारों ने समझ लिया है कि पार्टी के नेता क्या सुनना चाहते हैं। वे उसी हिसाब से हार के कारण बता रहे हैं। असल में चुनाव नतीजों के बाद राजद...

  • पूरे विपक्ष को वोट चोरी की आड़

    ऐसा लग रहा है कि जैसे देश के पूरे विपक्ष को वोट चोरी की एक आड़ मिल गई है, जिसके पीछे वे अपनी हार और कमजोरी के असली कारणों को छिपा रहे हैं। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे से लेकर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सब कह रहे हैं कि बिहार में वोट चोरी के काऱण महागठबंधन हारा है और एनडीए की जीत हुई है। पता नहीं विपक्ष नेता सिर्फ ऐसा कह रहे हैं या ऐसा मान भी रहे हैं! बहरहाल, सबूत के तौर पर साजिश थ्योरी है या कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रभारी सुप्रिया...

  • कीमत चुकाने का वक्त

    पिछले वित्त वर्ष में जिस राज्य में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के नौ फीसदी से ज्यादा रहा हो और जहां बजट का 64 प्रतिशत हिस्सा फिक्स्ड मदों में जाता हो, वहां ये सवाल अहम है कि अतिरिक्त धन कहां से आएगा? बिहार में चुनाव से ठीक पहले करोड़ों मतदाताओं को नकदी ट्रांसफर करने (या करने का वादा करने) का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दांव सटीक पड़ा। बेशक, एनडीए के पास बड़ा जातीय समीकरण है, जिससे दो दशक से उसे मजबूत मत आधार मिला हुआ है। फिर भी “कल्याणकारी कदमों” से ‘अतिरिक्त वोट’ जुटाने की चुनौती उसके सामने बनी रहती है। इसलिए...

  • कम सीटों पर ज्यादा मजबूत थे नीतीश

    नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू को 83 सीटें मिली हैं। 2010 के चुनाव के बाद यह उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन है। पिछली बार के मुकाबले उनकी सीटें लगभग दोगुनी हो गई हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 43 सीटें मिली थीं। अब सवाल है कि क्या 43 से बढ़ कर 83 सीटों पर पहुंचने के बाद नीतीश ज्यादा मजबूत हुए हैं या उनकी राजनीतिक मोलभाव करने की ताकत कम हो गई है? इस सवाल का जवाब भाजपा के नंबरों में निहित है। भारतीय जनता पार्टी बिहार विधानसभा में पहली बार चुनाव जीत कर सबसे बड़ी...

  • बिहार में चला मोदी-नीतीश का जादू

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित समारोह से पहले सोशल मीडिया में एक वाक्य में बिहार के परिणामों की व्याख्या करते हुए लिख दिया था कि बिहार के लोगों ने सुशासन को चुना है। इस वाक्य में समूचा बिहार चुनाव छिपा है। बिहार में आरंभ से ही इस बात का मुकाबला था कि लोगों को नब्बे के दशक के ‘जंगल राज’ में लौटना है या सुशासन की निरंतरता जारी रखनी है। बिहार के सजग और जागरूक मतदाताओं ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने ‘जंगल राज’ की वापसी की संभावना को लगभग स्थायी रूप से समाप्त कर दिया। इस...

  • जाति की राजनीति ही जीती

    बिहार में अगर एक तरफ ‘मुफ्त की रेवड़ी’ की बहार थी तो दूसरी ओर जाति राजनीति का दांव था। इसे भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यू ने दोनों को बराबर साधा। सरकारी खजाने से नकद पैसे और मुफ्त की सेवाएं बांट कर सरकार के प्रति बन रही नाराजगी को दूर किया गया। यह एनडीए के रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती थी कि नीतीश कुमार की सत्ता 20 साल की हो गई और लगातार 20 साल सरकार में रहने की वजह से कहीं न कहीं लोगों में नाराजगी है या थकान और उब है। इसको दूर करने के लिए सरकारी...

  • ‘एसआईआर ने खेल किया’, बिहार चुनाव के रुझानों पर विपक्ष ने उठाए सवाल

    बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सीटों पर आए रुझानों में एनडीए बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है, जबकि महागठबंधन को करारा झटका लगने जा रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा 90 और जेडीयू 80 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं राजद 28 और कांग्रेस 5 सीटों पर आगे है।  वहीं रुझानों को लेकर अब विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। रुझान में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा और कहा कि बिहार चुनाव के...

  • बिहार चुनाव : मोकामा में ‘छोटे सरकार’ का दबदबा बरकरार

    बिहार की चर्चित मोकामा विधानसभा सीट पर जेडीयू नेता और बाहुबली अनंत सिंह ने बड़ी जीत हासिल की। चुनाव प्रचार नहीं कर पाने और जेल में होने के बावजूद अनंत सिंह ने 28,206 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। उन्हें कुल 91,416 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रही आरजेडी उम्मीदवार वीना देवी को 63,210 वोट मिले। वहीं, जनसुराज के प्रियदर्शी पीयूष तीसरे नंबर पर रहे, जिन्हें 19,365 वोट मिले। चुनाव प्रचार के दौरान बाहुबली दुलारचंद यादव की हत्या के बाद इस चुनाव में अनंत सिंह पर कई सवाल उठे थे, लेकिन नतीजों ने साफ कर दिया कि...

  • जिसकी संख्या भारी उसको मिलेगी जीत

    बिहार में चुनाव इस बार भी अपवाद साबित नहीं हुआ। इस बार भी सभी 243 सीटों पर जातीय समीकरण के आधार पर ही चुनाव लड़ा गया और लोगों का मतदान व्यवहार भी पार्टियों के सामाजिक समीकरण और नेताओं की जाति से तय हुआ। इसके कुछ अपवाद भी हैं लेकिन उन अपवादों के आधार पर बिहार के चुनाव की व्याख्या नहीं हो सकती है। चुनाव की दूसरी खास बात यह रही कि किसी तरह की लहर न तो ऊपर से दिखाई दे रही थी और न कोई अंतर्धारा थी। तीसरी खास बात यह है कि बिहार में एक व्यक्ति, नीतीश कुमार...

  • रिकॉर्ड वोटिंग का क्या अर्थ है?

    वोटर टर्नआउट की व्याख्या करने की एक शास्त्रीय विधि है, जिसके मुताबिक कम मतदान का मतलब है यथास्थिति बरकरार रहना और ज्यादा मतदान का मतलब है सत्ता परिवर्तन। लेकिन यह एक रूढ़ परिभाषा है, जो कई बार गलत साबित हो चुकी है। सीएसडीएस के संजय कुमार ने अपने लेख में बताया है कि 2020 तक अलग अलग राज्यों में हुए 332  विधानसभा चुनावों में से 188 चुनावों में मतदान का प्रतिशत बढ़ा तो उसमें से 89 सरकारें दोबारा चुनी गईं। इसी तरह 144 बार मतदान प्रतिशत कम हुआ उसमें 56 बार सरकार रिपीट हुई। इसका मतलब है कि मतदान प्रतिशत...

  • नीतीश ने भी दिखाए तेवर

    बिहार विधानसभा का चुनाव समाप्त हो गया है और अब नतीजों का इंतजार हो रहा है। लगभग सभी एक्जिट पोल बिहार में एनडीए की सरकार बनने की संभावना जता रहे हैं। असली नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। लेकिन यह चुनाव भाजपा के लिए सबक वाला रहा। नीतीश कुमार को लेकर भारी कुंठा का शिकार भाजपा के नेता इस बार निर्णायक रूप से उनको किनारे करने के लक्ष्य के साथ बिहार में राजनीति कर रहे थे। लेकिन अंत में सबको उनकी शरण में जाना पड़ा। हालांकि नीतीश ने किनारे करने की कोशिशों को बखूबी पकड़ा और इससे नाराज भी हुए। अपनी...

  • बिहार में रिकॉर्ड मतदान

    पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण में रिकॉर्ड मतदान हुआ है। आजादी के बाद पहली बार बिहार में करीब 70 फीसदी मतदान हुआ। पहले चरण में 65 फीसदी वोट पड़े थे और वह भी एक रिकॉर्ड था और पांच दिन बाद दूसरे चरण में वह रिकॉर्ड टूट गया। दूसरे चऱण में 68 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है। यह आरंभिक आंकड़ा है। इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। इस तरह पूरे चुनाव में भी मतदान का आंकड़ा 67 फीसदी से करीब रहेगा। मंगलवार के दूसरे चरण के मतदान में मुस्लिम बहुल किशनगंज में सबसे ज्यादा 77.75 फीसदी मतदान...

  • बिहार चुनाव: दूसरे चरण में शाम पांच बजे तक 67 फीसदी से अधिक मतदान

    बिहार चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मंगलवार को 20 जिलों की 122 सीटों पर शांतिपूर्ण ढंग से मतदान संपन्न हो गया। इसे लेकर मतदाताओं में काफी उत्साह दिखा। चुनाव आयोग के अनुसार, शाम पांच बजे तक 67.14 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सबसे अधिक किशनगंज में 76.26 फीसदी वोट पड़े हैं।   निर्वाचन आयोग के मुताबिक, शाम पांच बजे तक पश्चिमी चंपारण में 69.02 प्रतिशत, पूर्वी चंपारण में 69.31, शिवहर में 67.31 प्रतिशत, सीतामढ़ी में 65.29 प्रतिशत, मधुबनी में 61.79 प्रतिशत, सुपौल में 70.69 प्रतिशत, अररिया में 67.79 प्रतिशत, किशनगंज में 76.26 प्रतिशत, पूर्णिया में 73.79 प्रतिशत, कटिहार में...

  • बिहार चुनाव: मतदाताओं में उत्साह, 11 बजे तक 31.38 फीसदी मतदान, किशनगंज सबसे आगे

    बिहार में मंगलवार की सुबह सात बजे से विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 20 जिलों के 122 सीटों पर शांतिपूर्ण ढंग से मतदान का कार्य जारी है। इस बीच, पूर्वाह्न 11 बजे तक 31.38 प्रतिशत मतदान किया गया है। पहले चार घंटे में सबसे अधिक किशनगंज में 34.74 फीसदी जबकि मधुबनी में 28.66 प्रतिशत वोट पड़े हैं। निर्वाचन विभाग के मुताबिक, सुबह नौ बजे तक पश्चिमी चंपारण में 32.39 प्रतिशत, पूर्वी चंपारण में 31.16, शिवहर में 31.58 प्रतिशत, सीतामढ़ी में 29.81, मधुबनी में 28.66, सुपौल में 31.69 , अररिया में 31.88 प्रतिशत, किशनगंज में 34.74 प्रतिशत, पूर्णिया...

  • बिहार में कितने तरह की अफवाहें!

    बिहार विधानसभा चुनाव अब तक का संभवतः सबसे छोटा चुनाव रहा। छह अक्टूबर को चुनाव की घोषणा के बाद 40 दिन के अंदर चुनाव की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। आखिरी चरण का मतदान मंगलवार, 11 नवंबर को होगा और उसके तीन दिन बाद 14 नवंबर को वोटों की गिनती हो जाएगी। लेकिन ये 40 दिन बहुत सघन प्रचार के रहे हैं। दर्जनों हेलीकॉप्टर उड़ते रहे और छोटे, बड़े नेताओं की हजारों जनसभाएं हुईं। इनके अलावा सोशल मीडिया में प्रचार अलग चला। यह सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर का पहला बिहार चुनाव था तो उसकी भी ताकत दिखी।...

  • बिहार में आज 122 सीटों पर मतदान

    पटना। बिहार विधानसभा की बची हुई 122 सीटों पर मंगलवार को दूसरे और अंतिम चरण में वोट डाले जाएंगे। 20 जिलों की 122 सीटों पर कुल 1,302 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। मतदान सुबह सात बजे से शुरू होगा और शाम छह बजे तक चलेगा। कुछ संवेदनशील मतदान केंद्रों पर चार बजे और कुछ केंद्रों पर पांच बजे ही मतदान समाप्त हो जाएगा। मतदान के बाद अलग अलग समूहों के एक्जिट पोल के अनुमान सामने आएंगे। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। दूसरे चरण की 122 सीटों के लिए 45,399 बूथ बनाए गए हैं। सोमवार की शाम तक सभी...

  • नीतीशः बनाई विरासत से ज़्यादा रहना!

    सत्ता, एक बार मिल जाए तो छूटती नहीं। वह धीरे-धीरे रगों में आदत बनकर उतर जाती है,  और फिर वही मृगतृष्णा बनी हुई होती! यह भारत के लोकतंत्र की खास पहचान है। जो नेता ज़िंदगी भर सीढ़ियाँ चढ़ते हैं, वे शिखर को ही फिर नियति मान लेते हैं। जितना ज़्यादा ठहरते हैं, उतना ही खुद को ‘अविनाशी’ समझने लगते हैं।  नेता अपने ही स्थायित्व का प्रवक्ता बन जाता हैं। और सत्ता से ऐसा मोह किसी एक पीढ़ी की बीमारी नहीं है। हमारे नेता, चाहे पुराने हों या नए, सत्ता से तब तक चिपके रहते हैं जब तक ‘आगमन’ ‘अंतिम अध्याय’...

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