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कौन राहुल की टिकट तय करेगा?

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राहुल गांधी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ गाजियाबाद में प्रेस कांफ्रेंस की तो उनसे अमेठी में चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी तय करेगी कि वे लड़ेंगे या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि वायनाड से उनके लड़ने का फैसला भी पार्टी ने किया। अब सवाल है कि पार्टी में कौन आलाकमान है, जो तय करेगा कि वे अमेठी से लड़ेंगे या नहीं? आलाकमान तो खुद राहुल गांधी हैं। उनको तय करना है कि वे एक सीट से लड़ेंगे या दो सीट से और दूसरी सीट से लड़ेंगे तो वह सीट अमेठी होगी या दूसरी होगी। उनके पास टीम है, पार्टी का पूरा ढांचा है, सर्वे की रिपोर्ट और जमीनी फीडबैक होगी, जिसके आधार पर फैसला होना है। लेकिन यह फैसला पार्टी पर टालने का क्या मतलब है?

अमेठी और रायबरेली के बारे में फैसला नहीं होने से भाजपा को मौका मिला है कि वह राहुल को निशाना बनाए। खुद प्रधानमंत्री मोदी इसे मुद्दा बना रहे हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि राहुल गांधी 26 अप्रैल के बाद अमेठी से नामांकन करेंगे क्योंकि कांग्रेस उनके वायनाड से जीतने को लेक आश्वस्त नहीं है। यह बात प्रधानमंत्री ने बाद में सभाओं में भी कही और दावा किया कि राहुल वायनाड से भी हार रहे हैं और वहां से भी भागेंगे। सवाल है कि क्या सचमुच कांग्रेस वायनाड को लेकर चिंता में है? वहां से सीपीआई के महासचिव डी राजा की पत्नी ऐनी राजा के लड़ने से मुकाबला कांटे का हुआ है फिर भी कांग्रेस को एडवांटेज है। लेकिन अमेठी से राहुल के लड़ने या नहीं लड़ने की घोषणा को लंबित रख कर कांग्रेस ने खुद संशय पैदा किया है। यह संयोग भी है कि 26 अप्रैल को जिस दिन वायनाड में चुनाव है उसी दिन से अमेठी में नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। वहां पांचवें चरण में मतदान होना है। ऐसा लग रहा है कि 26 अप्रैल से पहले कांग्रेस अमेठी और रायबरेली की घोषणा नहीं करेगी।

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