समूचा राइटविंग इस समय जय जयकारे लगा रहा है क्योंकि सरकार की ओर से नैरेटिव बनाया गया है कि जो काम राजीव गांधी नहीं कर पाए थे वह काम मोदीजी ने कर दिया है। मोदीजी ने जिमखाना क्लब को बंद कराने का आदेश जारी करवा दिया है। पांच जून तक क्लब को अपनी 27.3 एकड़ जमीन सरेंडर करनी है और क्लब को ताला लगाना है। क्लब के सदस्यों की ओर से कहा गया है कि वे इस आदेश को अदालत में चुनौती देंगे। लेकिन उससे कुछ नहीं होना है। अगर सरकार ने ठान लिया है कि जिमखाना क्लब को बंद करना है और उसकी जमीन ले लेनी है तो अदालत से कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
सवाल है कि सरकार क्यों इसे बंद कराना चाहती है? यह अंग्रेजों के राज में बना था इसलिए या दिल्ली के अभिजात्य वर्ग का अड्डा है इसलिए या प्रधानमंत्री को अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है? ध्यान रहे जिमखाना क्लब कोई खान मार्केट टाइप का नहीं है या कम से कम प्रधानमंत्री की ओर से कभी नहीं कहा गया है कि जिमखाना क्लब गैंग उनको पसंद नहीं करता है और उनके खिलाफ साजिश करता है। ज्यादातर अधिकारी इसके सदस्य होते हैं, जिनका पूरा जीवन नेताओं के आगे पीछे घूमने और अच्छी पोस्टिंग हासिल करने में बीतता है। वे तो सरकार के विरोध के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। अंग्रेजी राज के प्रतीक भी तभी मिटाए जाते हैं, जब उसका कोई राजनीतिक लाभ मिलना हो। तभी क्या सुरक्षा कारणों से जमीन खाली कराई जा रही है? ध्यान रहे इसके एकदम सटे प्रधानमंत्री का निवास है। हालांकि 15 एकड़ में बन रहे प्रधानमंत्री एन्क्लेव का काम भी पूरा होने वाला है। इसलिए कोई स्पष्ट कारण नहीं दिख रहा है। हो सकता है कि परपीड़ा सुख के लिए या किसी को सदस्यता नहीं मिलने की कुंठा में या राहुल गांधी के बैकडोर से सदस्य बन जाने की खुन्नस में इसे खाली कराया जा रहा हो। कोई ठोस और तार्किक कारण समझ में नहीं आ रहा है।
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