अचानक उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को बदले जाने की चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि राज्यपाल के तौर पर वे 10 साल पूरे करने जा रही हैं। उत्तर प्रदेश में ही उनको सात साल होने जा रहे हैं। वे 29 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनी थीं। उससे पहले वे मध्य प्रदेश की राज्यपाल थीं। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद वे गुजरात की मुख्यमंत्री बनी थीं। वहां से हटने के थोड़े दिन बाद वे राज्यपाल बनीं। अगले साल उत्तर प्रदेश और गुजरात दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव है। ऐसे में उनके बदलाव की चर्चा अनायास तो नहीं हो सकती है।
कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार के किसी बड़े मंत्री को सरकार से हटाया जाएगा और उनको सांत्वना के तौर पर उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनाया जाएगा। लेकिन आनंदी बेन पटेल का क्या होगा? यूपी के चुनाव में गैर यादव पिछड़ी जातियों को क्या संदेश जाएगा और क्या उनके गुजरात लौटने से वहां की राजनीति में एक नया शक्ति केंद्र नहीं बनेगा? यूपी के अलावा कुछ और राज्यों में राज्यपाल बदले जाने की चर्चा है। हालांकि ज्यादातर राज्यपाल अपेक्षाकृत नए हैं। सिर्फ गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को इस साल जुलाई में सात साल और कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत को जुलाई में पांच साल होने जा रहे हैं। प्रशासकों और उप राज्यपालों में कुछ लोगों के कार्यकाल पूरे हो गए हैं। इसलिए कोई व्यापक बदलाव होगा, यह नहीं कहा जा सकता है।


