जब से केंद्र सरकार में फेरबदल की चर्चा चल रही है तब से सहयोगी दलों, नए सहयोगी दलों और संभावित सहयोगी दलों की भी उम्मीदें जगी हैं। उनको लग रहा है कि उनकी पार्टी को भी नरेंद्र मोदी की सरकार में जगह मिल सकती है। वैसे सहयोगियों के लिए फॉर्मूला तय है लेकिन बिहार की सहयोगी जनता दल यू को फिर भी उम्मीद इसलिए है क्योंकि पहले उसके पास राज्यसभा के उप सभापति का पद था। जदयू ने हरिवंश को तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजा तो केंद्र सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति कोटे से मनोनीत कराया और उप सभापति बनाया। सो, जदयू का दावा एक और मंत्री पद का है। संजय झा के नाम की चर्चा है। इसके अलावा जदयू कोटे के कैबिनेट मंत्री ललन सिंह के विभाग बदलने की भी चर्चा है।
भाजपा की एक सहयोगी नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया है, जिसको अचानक 20 सांसद मिल गए हैं। तृणमूल छोड़ने वाले सांसद इस पार्टी में गए हैं। इनमें से सुदीप बंदोपाध्याय, शर्मिला सरकार, शताब्दी रॉय या काकोली घोष दस्तीदार में से दो लोगों के मंत्री बनने की चर्चा है। एकनाथ शिंदे की शिव सेना को उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद और मिले हैं। इस तरह उनकी संख्या बढ़ कर 13 होने वाली है। उनकी पार्टी के प्रताप राव जाधव केंद्र में मंत्री हैं। लेकिन शिंदे अपने बेटे श्रीकांत को मंत्री बनाना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि उद्धव की पार्टी छोड़ने वाले छह में से भी किसी एक को मंत्री बनाने की बात है। उधर शरद पवार की पार्टी के सांसदों के टूटने या दोनों एनसीपी के विलय की चर्चा है। ऐसे में एक मंत्री पद उधर भी जा सकता है। विलय हुआ तो सुप्रिया सुले अन्यथा बागियों में से कोई एक। वैसे सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ भी राज्यसभा पहुंच गए हैं। वैसे चर्चा तो हेमंत सोरेन के तीन लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसदों में से भी किसी के मंत्री बनने की है।
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