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सीपीएम से कैसे निभाए कांग्रेस?

कांग्रेस और सीपीएम के बीच त्रिपुरा में तालमेल होने वाला है। दोनों पार्टियां इसकी घोषणा कर चुकी हैं। अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी महागठबंधन बनाने के लिए राजी नहीं होती हैं तो अगले लोकसभा चुनाव में बंगाल में भी कांग्रेस और लेफ्ट मिल कर लड़ेंगे। लेकिन उससे पहले कांग्रेस के लिए सीपीएम के साथ संबंध निभाना मुश्किल होता जा रहा है। राहुल गांधी और सीताराम येचुरी की केमिस्ट्री की वजह से दोनों पार्टियों का संबंध चल रहा है। पर अभी तक येचुरी भी राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में नहीं दिखे हैं। पता नहीं 30 जनवरी को श्रीनगर में होने वाली कांग्रेस की रैली में भी वे शामिल होंगे या नहीं। कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि सीपीएम महासचिव सहयोगी की तरह दिखाई दें। लेकिन सीपीएम ने रणनीति दूरी बना रखी है। इसके साथ ही पार्टी ऐसे काम भी कर रही है, जिससे कांग्रेस नेता परेशान हो रहे हैं।

पिछले साल कांग्रेस से निकाले गए केरल के दिग्गज नेता केवी थॉमस को सीपीएम की सरकार ने बड़ा पद दिया है। केरल की पिनरायी विजयन सरकार ने थॉमस को दिल्ली में अपना विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है और कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है। कांग्रेस में इसे लेकर नाराजगी है। कांग्रेस को लग रहा है कि थॉमस के जरिए सीपीएम ने लैटिन कैथोलिक ईसाई वोट को टारगेट किया है, जो कांग्रेस के साथ रहता है। ध्यान रहे थॉमस लैटिन कैथोलिक इसाई समुदाय के सबसे बड़े नेता हैं। इसी तरह केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के तेलंगाना जाकर के चंद्रशेखर राव की रैली में शामिल होने से भी कांग्रेस को आपत्ति है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सीपीएम कांग्रेस के साथ नहीं दिख रही है लेकिन कांग्रेस विरोध में होने वाली मोर्चाबंदी में शामिल हो रही है। राहुल से उम्मीद की जा रही है कि वे इस बारे में येचुरी से बात करेंगे।

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