भारतीय महिला हॉकी में वंदना कटारिया का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। पिछले एक दशक में भारतीय महिला हॉकी के उत्थान में जिन खिलाड़ियों का सबसे अहम योगदान रहा है, उनमें वंदना का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
वंदना का जन्म 15 अप्रैल, 1992 को रोशनाबाद, (पहले उत्तर प्रदेश, अब उत्तराखंड) में हुआ था। वंदना ने फॉरवर्ड के तौर पर बड़ी पहचान बनाई।
कटारिया को 2006 में भारतीय जूनियर टीम में चुना गया था। 2009 में उन्होंने सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई। 2013 महिला हॉकी जूनियर विश्व कप में भारत की शीर्ष गोल-स्कोरर होने के नाते वंदना ने प्रसिद्धि हासिल की थी। इस टूर्नामेंट में भारत ने कांस्य पदक जीता था।
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वंदना के करियर की उपलब्धियों पर गौर करें तो वह 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं। कटारिया को 2014 में हॉकी इंडिया के प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया था। 2014-15 एफआईएच हॉकी वर्ल्ड लीग के राउंड 2 में, उन्होंने 11 गोल किए थे और शीर्ष स्कोरर के रूप में टूर्नामेंट समाप्त किया था।
भारतीय टीम की कप्तान रह चुकीं वंदना ने 2016 रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। भारतीय टीम ने एशियन चैंपियन ट्रॉफी, 2018 में कोरिया के खिलाफ फाइनल गंवाया था, लेकिन वंदना कटारिया प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रही थीं। टोक्यो में 2020 समर ओलंपिक्स में, वंदना हॉकी में ओलंपिक हैट्रिक बनाने वाली पहली इंडियन महिला बनीं।
8 अगस्त, 2021 को उन्हें केंद्र के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ आंदोलन’ का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया। मार्च 2022 में, कटारिया को हॉकी के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वह अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित हैं। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में वंदना ने 320 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 158 गोल किए। वर्ष 2025 में, 1 अप्रैल को, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय हॉकी से संन्यास की घोषणा की थी।
Pic Credit : ANI
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