अमृतकाल के रंगरेज़ और चुनावों के खरगोश
बीजगणित तो कहता है कि असम में इस बार भाजपा कोई सरपट नहीं दौड़ रही है। कांग्रेस से उस का मुकाबला बराबर की टक्कर का है। हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता-लकीर इस बीच इसलिए बहुत तेज़ी से नीचे लुढ़की है कि चुनाव अभियान के दौरान उन की हताशाजनित अहंकारी ज़ुमलेबाज़ी को लोगों ने आमतौर पर नापसंद किया है। असम, केरल और पुडुचेरी की कुल 296 विधानसभा सीटों के लिए बृहस्पतिवार को हुए मतदान की कुछ नकारात्मक-सकारात्मक उपलब्धियों का ज़िक्र इसलिए ज़रूरी है कि हमारे देश के निर्वाचन-मौसम ने पिछले एक दशक में एक ही पल में माशा से तोला हो...