प्रतिपक्ष को कोंचते रहने का क़ौमी-कर्तव्य
विपक्ष के लिए आगत के आसार सुनहरे हैं। मगर नियम और शर्तों के साथ। सब से पहली शर्त है एकजुटता। इस के लिए ज़रूरी है आपसी समरसता। अपना-तेरी की भावना से मुक्ति। तात्कालिक अहंकार को तिलांजलि। अगर कश्मीर से कन्याकुमारी और गुवाहाटी से गोवा तक सभी प्रतिपक्षी राजनीतिक हस्तियों और उन के चंगूमंगुओं ने एकीकृत बने रहने की इस नियमावली का पालन किया तो 2029 की गर्मियां आते-आते पूरे मुल्क़ के आसमान का रंग बदल चुका होगा। पौने तीन साल बाद 2029 में लोकसभा के चुनाव तब जो होगा, सो, होगा। मगर तब तक क्या होगा? तब तक 24 नहीं...