मतदाताओं को कितना मासूम समझती हैं पार्टियां
पांच राज्यों के चुनाव चल रहे हैं और जिस तरह के मुद्दे उठाए जा रहे हैं, पार्टियां जिस तरह के बयान दे रही हैं और जिन उपायों के जरिए अपने को मतदाताओं का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की कोशिश कर रही हें उन्हें देख कर यह सवाल दिमाग में आता है कि पार्टियां मतदाताओं को जितना मासूम समझती हैं क्या वे सचमुच इतने मासूम होते हैं? क्या मतदाता अपने हितों और अपने जीवन से जुड़े मुद्दों के प्रति इतने अनजान होते हैं कि पार्टियां उनको जो समझाएंगी वे उसे ही समझेंगे और उसी हिसाब से मतदान करेंगे? अभी तक...